रंग Poetry (page 23)

ज़ोर यारो आज हम ने फ़तह की जंग-ए-फ़लक

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

यार निकला है आफ़्ताब की तरह

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

वहशत से हर सुख़न मिरा गोया ग़ज़ाला है

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

तिरी भुवाँ की तेग़ जब आई नज़र मुझे

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

सनम के देख कर लब और दहन सुर्ख़

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

ने शिकवा-मंद दिल से न अज़-दस्त-दीदा हूँ

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

कलेजा मुँह को आया और नफ़स करने लगा तंगी

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

इस वास्ते निकलूँ हूँ तिरे कूचे से बच बच

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

होवे वो शोख़-चश्म अगर मुझ से चार चश्म

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

देखना उस की तजल्ली का जिसे मंज़ूर है

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

चमन में दहर के हर गुल है कान की सूरत

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

अब की चमन में गुल का ने नाम ओ ने निशाँ है

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

साक़ी मय-ए-गुल-रंग मिरे लब से मिला देख

शैख़ मीर बख़्श मसरूर

ज़िंदगी को हम वफ़ा तक वो जफ़ा तक ले गए

शहज़ाद क़मर

मिरा नहीं तो वो अपना ही कुछ ख़याल करे

शहज़ाद नय्यर

सोचिए गर उसे हर-नफ़स मौत है कुछ मुदावा भी हो बे-हिसी के लिए

शहज़ाद अंजुम बुरहानी

सोचिए गर उसे हर नफ़स मौत है कुछ मुदावा भी हो बे-हिसी के लिए

शहज़ाद अंजुम बुरहानी

यूँ किस तरह बताऊँ कि क्या मेरे पास है

शहज़ाद अहमद

वो कौन है उसे सूरज कहूँ कि रंग कहूँ

शहज़ाद अहमद

उस को ख़बर हुई तो बदल जाएगा वो रंग

शहज़ाद अहमद

कभी कभी छलक उठता है आब ओ रंग उन का

शहज़ाद अहमद

हम कि इंसान नहीं आँखें हैं

शहज़ाद अहमद

दरख़्तों पर कोई पत्ता नहीं था

शहज़ाद अहमद

बे-शुमार आँखें

शहज़ाद अहमद

आँख-मिचोली

शहज़ाद अहमद

ये सोच कर कि तेरी जबीं पर न बल पड़े

शहज़ाद अहमद

ये भी सच है कि नहीं है कोई रिश्ता तुझ से

शहज़ाद अहमद

थोड़ा सा रंग रात के चेहरे पे डाल दो

शहज़ाद अहमद

तिरी तलाश तो क्या तेरी आस भी न रहे

शहज़ाद अहमद

तेरे घर की भी वही दीवार थी दरवाज़ा था

शहज़ाद अहमद

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