रंग Poetry (page 24)

सब्त है चेहरों पे चुप बन में अंधेरा हो चुका

शहज़ाद अहमद

प्यार के रंग-महल बरसों में तय्यार हुए

शहज़ाद अहमद

ख़ुद ही मिल बैठे हो ये कैसी शनासाई हुई

शहज़ाद अहमद

खिले जो फूल तो मुँह छुप गया सितारों का

शहज़ाद अहमद

कब तक कड़कती धूप में आँखें जलाएँ हम

शहज़ाद अहमद

दिल-ए-फ़सुर्दा उसे क्यूँ गले लगा न लिया

शहज़ाद अहमद

दिल से ये कह रहा हूँ ज़रा और देख ले

शहज़ाद अहमद

दिल ओ दिमाग़ में एहसास-ए-ग़म उभार दिया

शहज़ाद अहमद

दिल का बुरा नहीं मगर शख़्स अजीब ढब का है

शहज़ाद अहमद

दिल बहुत मसरूफ़ था कल आज बे-कारों में है

शहज़ाद अहमद

दरिया कभी इक हाल में बहता न रहेगा

शहज़ाद अहमद

बाग़-ए-बहिश्त के मकीं कहते हैं मर्हबा मुझे

शहज़ाद अहमद

बाग़ का बाग़ उजड़ गया कोई कहो पुकार कर

शहज़ाद अहमद

आती है दम-ब-दम ये सदा जागते रहो

शहज़ाद अहमद

आप भी नहीं आए नींद भी नहीं आई

शहज़ाद अहमद

तुझ से बिछड़े हैं तो अब किस से मिलाती है हमें

शहरयार

जब भी मिलती है मुझे अजनबी लगती क्यूँ है

शहरयार

ख़लीलुर्रहमान आज़मी की याद में

शहरयार

अपनी याद में

शहरयार

तुझ से बिछड़े हैं तो अब किस से मिलाती है हमें

शहरयार

जब भी मिलती है मुझे अजनबी लगती क्यूँ है

शहरयार

फ़ज़ा-ए-मय-कदा बे-रंग लग रही है मुझे

शहरयार

कार-ए-जहाँ दराज़ है

शहराम सर्मदी

कार-ए-बेहूदा

शहराम सर्मदी

ख़ला सा ठहरा हुआ है ये चार-सू कैसा

शहराम सर्मदी

ग़ुबार-ए-दर्द में राह-ए-नजात ऐसा ही

शहराम सर्मदी

ब-नाम-ए-इश्क़ इक एहसान सा अभी तक है

शहराम सर्मदी

पाप

शहनाज़ नबी

मुन्तज़िम

शहनाज़ नबी

कोलाज़

शहनाज़ नबी

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