प्रकाश Poetry (page 28)

पत्ता हूँ आँधियों के मुक़ाबिल खड़ा हूँ मैं

अज़हर अदीब

ज़िंदगी कैसे लगी दीवार से

अज़हर अब्बास

ये रात आख़िरी लोरी सुनाने वाली है

अज़हर अब्बास

ग़म का ये सलीक़ा भी रह गया है अब हम तक

अज़ीम मुर्तज़ा

दिल को रहीन-ए-लज़्ज़त-ए-दरमाँ न कर सके

आज़म चिश्ती

तुम्हारे पास रहें हम तो मौत भी क्या है

आज़ाद गुलाटी

इबारतें चमक रही हैं दिल में तेरे प्यार की

आयुष चराग़

शफ़क़ हूँ सूरज हूँ रौशनी हूँ

अय्यूब साबिर

मता-ए-फ़िक्र-ओ-नज़र रहा हूँ

अय्यूब साबिर

रहगुज़ारों में रौशनी के लिए

अय्यूब रूमानी

उस निगाह-ए-नाज़ ने यूँ रात-भर तज्सीम की

औरंगज़ेब

शिकस्ता-दिल की ख़ुशी दोस्तो ख़ुशी तो न थी

औलाद अली रिज़वी

ख़दशे थे शाम-ए-हिज्र के सुब्ह-ए-ख़ुशी के साथ

औलाद अली रिज़वी

घुटी घुटी सी फ़ज़ा में शगुफ़्तगी तो मिली

औलाद अली रिज़वी

तिरे फ़लक ही से टूटने वाली रौशनी के हैं अक्स सारे

अतीक़ुल्लाह

वो मेरे नाले का शोर ही था शब-ए-सियह की निहायतों में

अतीक़ुल्लाह

मैं छुपा रहूँगा निगाह-ओ-ज़ख़्म की ओट में

अतीक़ुल्लाह

कौन गुज़रा था मेहराब-ए-जाँ से अभी ख़ामुशी शोर भरता हुआ

अतीक़ुल्लाह

आसमाँ का सितारा न महताब है

अतीक़ुल्लाह

मोहब्बतें भी लिखी हुई हैं अदावतें भी लिखी हुई हैं

अतहर सलीमी

उभरा जो चाँद ऊँघती परछाइयाँ मिलीं

अतहर अज़ीज़

घटा ज़ुल्फ़ों की जब से और काली होती जाती है

अतीक़ असर

आई है जाने कैसे इलाक़ों से रौशनी

अतीक़ अहमद

किसी और को मैं तिरे सिवा नहीं चाहता

अताउल हसन

तन्हाइयों के दश्त में भागे जो रात भर

अता तुराब

गहरी है शब की आँच कि ज़ंजीर-ए-दर कटे

अता शाद

जानते थे ग़म तिरा दरिया भी था गहरा भी था

असरारुल हक़ असरार

वो शख़्स जो नज़र आता था हर किसी की तरह

असरार ज़ैदी

बिजली हुई फ़ेल

असरार जामई

पहचान ज़िंदगी की समझ कर मैं चुप रहा

असरार अकबराबादी

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