विदा Poetry (page 7)

ये कह दो बस मौत से हो रुख़्सत क्यूँ नाहक़ आई है उस की शामत

भारतेंदु हरिश्चंद्र

फ़साद-ए-दुनिया मिटा चुके हैं हुसूल-ए-हस्ती मिटा चुके हैं

भारतेंदु हरिश्चंद्र

अजब जौबन है गुल पर आमद-ए-फ़स्ल-ए-बहारी है

भारतेंदु हरिश्चंद्र

पछताओगे फिर हम से शरारत नहीं अच्छी

बेख़ुद देहलवी

दोनों ही की जानिब से हो गर अहद-ए-वफ़ा हो

बेख़ुद देहलवी

दिल है मुश्ताक़ जुदा आँख तलबगार जुदा

बेख़ुद देहलवी

नक़्श बर-दीवार

बेबाक भोजपुरी

ग़म-ए-आफ़ाक़ में आरिफ़ अगर करवट बदलता है

बेबाक भोजपुरी

जा कहे कू-ए-यार में कोई

बयाँ अहसनुल्लाह ख़ान

जैसे भी ये दुनिया है जो कुछ भी ज़माना है

बासित भोपाली

मेरी आँखों में तिरे प्यार का आँसू आए

बशीर बद्र

वो नज़र आईना-फ़ितरत ही सही

बाक़ी सिद्दीक़ी

दीदा-ए-तर

बलराज कोमल

काफ़िर तुझे अल्लाह ने सूरत तो परी दी

ज़फ़र

पर सऊबत रास्तों की गर्मियाँ भी दे गया

अज़रा वहीद

न हुई हम से शब बसर न हुई

अज़ीज़ लखनवी

इन की ठोकर में शरारत होगी

अज़ीज़ हैदराबादी

सूरत-ए-ज़ंजीर मौज-ए-ख़ूँ में इक आहंग है

अज़ीज़ हामिद मदनी

ज़िंदगी के सारे मौसम आ के रुख़्सत हो गए

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

ज़िंदगी के सारे मौसम आ के रुख़्सत हो गए

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

अपनी बीती हुई रंगीन जवानी देगा

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

शहर गुम-सुम रास्ते सुनसान घर ख़ामोश हैं

अज़हर नक़वी

हरे दरख़्त का शाख़ों से रिश्ता टूट गया

अज़हर नैयर

वो तड़प जाए इशारा कोई ऐसा देना

अज़हर इनायती

मंज़र-ए-शाम-ए-ग़रीबाँ है दम-ए-रुख़्सत-ए-ख़्वाब

अज़हर फ़राग़

दीवारें छोटी होती थीं लेकिन पर्दा होता था

अज़हर फ़राग़

रस्म-ए-अंदेशा से फ़ारिग़ हुए हम

आज़र तमन्ना

काश समझदार न बनूँ

अतीया दाऊद

एक ग़मगीन याद

असरार-उल-हक़ मजाज़

कुछ तुझ को ख़बर है हम क्या क्या ऐ शोरिश-ए-दौराँ भूल गए

असरार-उल-हक़ मजाज़

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