साथ Poetry (page 28)

तस्वीर-ए-इज़्तिराब सरापा बना हुआ

शफ़क़त काज़मी

तीर ख़त्म हैं तो क्या हाथ में कमाँ रखना

शफ़ीक़ सलीमी

रुकूँ तो रुकता है चलने पे साथ चलता है

शफ़ीक़ सलीमी

रहा शामिल जो मेरे रतजगों में कौन था वो

शफ़ीक़ सलीमी

बे-नाम दयारों का सफ़र कैसा लगा है

शफ़ीक़ सलीमी

बचा था एक जो वो राब्ता भी टूट गया

शफ़ीक़ सलीमी

मनाज़िर हसीं हैं जो राहों में मेरी

शफ़ीक़ ख़लिश

भरी महफ़िल में तन्हाई का आलम ढूँड लेता है

शफ़ीक़ ख़लिश

ज़िंदगी तुझ से हमें अब कोई शिकवा ही नहीं

शफ़ीक़ देहलवी

मोहब्बत की करिश्मा-साज़ियाँ आवाज़ देती हैं

शफ़ीक़ आसिफ़

मज़ा शबाब का जब है कि बा-ख़ुदा भी रहे

शायर फतहपुरी

सुना हम को आते जो अंदर से बाहर

शाद लखनवी

इश्क़-ए-रुख़-ओ-ज़ुल्फ़ में किया कूच

शाद लखनवी

हर शब ख़याल-ए-ग़ैर के मारे अलग-थलग

शाद लखनवी

निहायत इंकिसारी आजिज़ी से बात करते हैं

शाद बिलगवी

हाथ से हाथ मिला दिल से तबीअ'त न मिली

शाद बिलगवी

ये रात भयानक हिज्र की है काटेंगे बड़े आलाम से हम

शाद अज़ीमाबादी

क्या फ़क़त तालिब-ए-दीदार था मूसा तेरा

शाद अज़ीमाबादी

काबा ओ दैर में जल्वा नहीं यकसाँ उन का

शाद अज़ीमाबादी

जिसे पाला था इक मुद्दत तक आग़ोश-ए-तमन्ना में

शाद अज़ीमाबादी

हज़ार हैफ़ छुटा साथ हम-नशीनों का

शाद अज़ीमाबादी

ज़ौक़-ए-नज़र को इज़्न-ए-नज़ारा न मिल सका

शबनम शकील

वहाँ भी ज़हर-ज़बाँ काम कर गया होगा

शबनम शकील

सिमट न पाए कि हर-सू बिखर गए थे हम

शबनम शकील

सफ़र की आख़िरी मंज़िल के राहबर हम हैं

शबनम शकील

सब तोड़ के बंधन दुनिया के मैं प्यार की जोत जगाऊँगी

शबनम शकील

मिरा जीना गवाही दे रहा है

शबनम शकील

मौसम के पास कोई ख़बर मो'तबर भी हो

शबनम शकील

कितने आसान रास्ते होते

शबनम शकील

गए बरस की यही बात यादगार रही

शबनम शकील

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