यात्रा Poetry (page 67)

ख़ुद-फ़रामोश जो पाया है मुझे दुनिया ने

अख़तर बस्तवी

यूँ बदलती है कहीं बर्क़-ओ-शरर की सूरत

अख़्तर अंसारी अकबराबादी

तवील-तर है सफ़र मुख़्तसर नहीं होता

अख़्तर अमान

इधर चराग़ जल गए उधर चराग़ जल गए

अख़लाक़ बन्दवी

उड़ा के फिर वही गर्द-ओ-ग़ुबार पहले सा

अखिलेश तिवारी

काग़ज़ प हर्फ़ हर्फ़ निखर जाना चाहिए

अखिलेश तिवारी

कभी तो डूब चले हम कभी उभरते हुए

अखिलेश तिवारी

लुटाऊँ मस्तियाँ सरसब्ज़ रहगुज़र की तरह

अकबर काज़मी

पहुँच के जो सर-ए-मंज़िल बिछड़ गया मुझ से

अकबर हैदराबादी

मुसाफ़िरत का वलवला सियाहतों का मश्ग़ला

अकबर हैदराबादी

निगह-ए-शौक़ से हुस्न-ए-गुल-ओ-गुलज़ार तो देख

अकबर हैदराबादी

कुल आलम-ए-वुजूद कि इक दश्त-ए-नूर था

अकबर हैदराबादी

बदन से रिश्ता-ए-जाँ मो'तबर न था मेरा

अकबर हैदराबादी

ये तन घिरा हुआ छोटे से घर में रहता है

अकबर अली खान अर्शी जादह

वही गुमाँ है जो उस मेहरबाँ से पहले था

अकबर अली खान अर्शी जादह

तुम्हारे दिल की तरह ये ज़मीन तंग नहीं

अकबर अली खान अर्शी जादह

कभी ज़ख़्म ज़ख़्म निखर के देख कभी दाग़ दाग़ सँवर के देख

अकबर अली खान अर्शी जादह

इतना करम इतनी अता फिर हो न हो

अजमल सिद्दीक़ी

वक़्त-ए-सफ़र क़रीब है बिस्तर समेट लूँ

अजमल अजमली

रास्ते के पेच-ओ-ख़म क्या शय हैं सोचा ही नहीं

अजमल अजमली

हर उजाला नई सहर तो नहीं

अजमल अजमली

आज़ार बहुत लज़्ज़त-ए-आज़ार बहुत है

अजमल अजमली

हर-सू जहाँ में शाम ओ सहर ढूँडते हैं हम

आजिज़ मातवी

इश्क़ जन्मों का है सफ़र शायद

अजीत सिंह हसरत

गुज़रे जिधर से नूर बिखेरे चले गए

अजीत सिंह हसरत

धुआँ सिफ़त हूँ ख़लाओं का है सफ़र मुझ को

अजीत सिंह हसरत

लगा के धड़कन में आग मेरी ब-रंग-ए-रक़्स-ए-शरर गया वो

अजय सहाब

बरसों ब'अद हमें देखा तो पहरों उस ने बात न की

ऐतबार साजिद

ज़ख़्मों का दो-शाला पहना धूप को सर पर तान लिया

ऐतबार साजिद

तिलिस्म-ज़ार-ए-शब-ए-माह में गुज़र जाए

ऐतबार साजिद

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