सहर Poetry (page 37)

सुब्ह-ए-विसाल-ए-ज़ीस्त का नक़्शा बदल गया

अमानत लखनवी

रवाँ दवाँ नहीं याँ अश्क चश्म-ए-तर की तरह

अमानत लखनवी

उस के जाते ही ये क्या हो गई घर की सूरत

अल्ताफ़ हुसैन हाली

है जुस्तुजू कि ख़ूब से है ख़ूब-तर कहाँ

अल्ताफ़ हुसैन हाली

जज़्ब कुछ तितलियों के पर में है

आलोक मिश्रा

ज़ोहद और रिंदी

अल्लामा इक़बाल

तारिक़ की दुआ

अल्लामा इक़बाल

राम

अल्लामा इक़बाल

मस्जिद-ए-क़ुर्तुबा

अल्लामा इक़बाल

हिमाला

अल्लामा इक़बाल

फ़ुनून-ए-लतीफ़ा

अल्लामा इक़बाल

फ़रिश्ते आदम को जन्नत से रुख़्सत करते हैं

अल्लामा इक़बाल

एक आरज़ू

अल्लामा इक़बाल

तिरे इश्क़ की इंतिहा चाहता हूँ

अल्लामा इक़बाल

ताज़ा फिर दानिश-ए-हाज़िर ने किया सेहर-ए-क़ादिम

अल्लामा इक़बाल

नाला है बुलबुल-ए-शोरीदा तिरा ख़ाम अभी

अल्लामा इक़बाल

खो न जा इस सहर ओ शाम में ऐ साहिब-ए-होश

अल्लामा इक़बाल

ख़िरद ने मुझ को अता की नज़र हकीमाना

अल्लामा इक़बाल

ख़िरद के पास ख़बर के सिवा कुछ और नहीं

अल्लामा इक़बाल

हादसा वो जो अभी पर्दा-ए-अफ़्लाक में है

अल्लामा इक़बाल

गर्म-ए-फ़ुग़ाँ है जरस उठ कि गया क़ाफ़िला

अल्लामा इक़बाल

एजाज़ है किसी का या गर्दिश-ए-ज़माना

अल्लामा इक़बाल

आलम-ए-आब-ओ-ख़ाक-ओ-बाद सिर्र-ए-अयाँ है तू कि मैं

अल्लामा इक़बाल

तुम्हारा शहर

अली सरदार जाफ़री

तुम नहीं आए थे जब

अली सरदार जाफ़री

शुऊर

अली सरदार जाफ़री

सर-ए-तूर

अली सरदार जाफ़री

मिरे अज़ीज़ो, मिरे रफ़ीक़ो

अली सरदार जाफ़री

फ़रेब

अली सरदार जाफ़री

एक ख़्वाब और

अली सरदार जाफ़री

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