रात Poetry (page 19)

पहले हुआ जो करते थे हम वो नहीं रहे

शुजा ख़ावर

मेरा दिल हाथों में लो तो क्या तुम्हारा जाएगा

शुजा ख़ावर

दूसरी बातों में हम को हो गया घाटा बहुत

शुजा ख़ावर

दिन के पास कहाँ जो हम रातों में माल बनाते हैं

शुजा ख़ावर

चलो ये तो हादसा हो गया कि वो साएबान नहीं रहा

शुजा ख़ावर

गिल भीक में लेते हैं जिस फूल से रानाई

शुजा

ज़रा सब्र!

शोरिश काश्मीरी

हिज्र ओ विसाल

शोरिश काश्मीरी

वो जिस के दिल में निहाँ दर्द दो-जहाँ का था

शोला हस्पानवी

जब मंज़िलों वहम था न शब का

शोहरत बुख़ारी

हम पी गए सब हिले न लब तक

शोहरत बुख़ारी

हम पी गए सब हिले न अब तक

शोहरत बुख़ारी

हर लम्हा था सौ साल का टलता भी तो कैसे

शोहरत बुख़ारी

इक उम्र फ़साने ग़म-ए-जानाँ के गढ़े हैं

शोहरत बुख़ारी

दिल सख़्त निढाल हो गया है

शोहरत बुख़ारी

ये धुँद ये ग़ुबार छटे तो पता चले

शोएब निज़ाम

तेरा चेहरा देख के हर शब सुब्ह दोबारा लिखती है

शोएब निज़ाम

सफ़र सराबों का बस आज कटने वाला है

शोएब निज़ाम

हवस के बीज बदन जब से दिल में बोने लगा

शोएब निज़ाम

एक ज़र्रा भी न मिल पाएगा मेरा मुझ को

शोएब बिन अज़ीज़

दिल पर सितम हज़ार करे बेवफ़ा के लब

शमशाद शाद

तअल्लुक़ात चटख़्ते हैं टूट जाते हैं

शिफ़ा कजगावन्वी

पूछते क्या हो जो हाल-ए-शब-ए-तन्हाई था

शिबली नोमानी

कुछ अकेली नहीं मेरी क़िस्मत

शिबली नोमानी

ज़ुल्फ़-ए-जानाँ पे तबीअत मिरी लहराई है

शेर सिंह नाज़ देहलवी

क़ुल्ज़ुम-ए-उल्फ़त में वो तूफ़ान का आलम हुआ

शेर सिंह नाज़ देहलवी

कुछ इशारे वो सर-ए-बज़्म जो कर जाते हैं

शेर सिंह नाज़ देहलवी

हिजाब-ए-राज़ फ़ैज़-ए-मुर्शिद-ए-कामिल से उठता है

शेर सिंह नाज़ देहलवी

मेहरबाँ पाते नहीं तेरे तईं यक आन हम

शेर मोहम्मद ख़ाँ ईमान

दिल के आईने में नित जल्वा-कुनाँ रहता है

शेर मोहम्मद ख़ाँ ईमान

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