रात Poetry (page 33)

हूँ पारसा तिरे पहलू में शब गुज़ार के भी

सलीम सिद्दीक़ी

बदन क़ुबूल है उर्यानियत का मारा हुआ

सलीम सिद्दीक़ी

यक़ीन है कि वो मेरी ज़बाँ समझता है

सलीम शहज़ाद

ज़ुल्मत है तो फिर शो'ला-ए-शब-गीर निकालो

सलीम शाहिद

ये फ़ैसला भी मिरे दस्त-ए-बा-कमाल में था

सलीम शाहिद

वो ख़ूँ बहा कि शहर का सदक़ा उतर गया

सलीम शाहिद

फिर कोई महशर उठाने मेरी तन्हाई में आ

सलीम शाहिद

मत पूछ कि इस पैकर-ए-ख़ुश-रंग में क्या है

सलीम शाहिद

जुरअत-ए-इज़हार का उक़्दा यहाँ कैसे खुले

सलीम शाहिद

इन दर-ओ-दीवार की आँखों से पट्टी खोल कर

सलीम शाहिद

दर्द की ख़ुश्बू से सारा घर मोअ'त्तर हो गया

सलीम शाहिद

बे-वज़्अ शब-ओ-रोज़ की तस्वीर दिखा कर

सलीम शाहिद

तू ने ग़म ख़्वाह-मख़ाह उस का उठाया हुआ है

सलीम सरफ़राज़

जो मिरी रियाज़त-ए-नीम-शब को 'सलीम' सुब्ह न मिल सकी

सलीम कौसर

साल की आख़िरी शब

सलीम कौसर

न इस तरह कोई आया है और न आता है

सलीम कौसर

मैं ख़याल हूँ किसी और का मुझे सोचता कोई और है

सलीम कौसर

कुछ भी था सच के तरफ़-दार हुआ करते थे

सलीम कौसर

ऐ शब-ए-हिज्र अब मुझे सुब्ह-ए-विसाल चाहिए

सलीम कौसर

अभी जो गर्दिश-ए-अय्याम से मिला हूँ मैं

सलीम कौसर

अब फ़ैसला करने की इजाज़त दी जाए

सलीम कौसर

आब ओ हवा है बरसर-ए-पैकार कौन है

सलीम कौसर

ग़मों की आग पे सब ख़ाल-ओ-ख़द सँवारे गए

सलीम फ़िगार

ग़मों की आग पे सब ख़ाल-ओ-ख़द सँवारे गए

सलीम फ़िगार

ये ख़याल अब तो दिल-आज़ार हमारे लिए है

सलीम फ़राज़

वो तीरगी-ए-शब है कि घर लौट गए हैं

सलीम फ़राज़

क्या लुत्फ़ हवाओं के सफ़र में नहीं रक्खा

सलीम फ़राज़

कम रंज मौसम-ए-गुल-ए-तर ने नहीं दिया

सलीम फ़राज़

जी में आता है कि इक रोज़ ये मंज़र देखें

सलीम बेताब

क़िस्सा छेड़ा मेहर ओ वफ़ा का अव्वल-ए-शब उन आँखों ने

सलीम अहमद

Collection of Hindi Poetry. Get Best Hindi Shayari, Poems and ghazal. Read shayari Hindi, poetry by famous Hindi and Urdu poets. Share poetry hindi on Facebook, Whatsapp, Twitter and Instagram.