रात Poetry (page 32)

ग़श भी आया मिरी पुर्सिश को क़ज़ा भी आई

साक़िब लखनवी

मुहासबा

साक़ी फ़ारुक़ी

डस्टबिन

साक़ी फ़ारुक़ी

बाकिरा

साक़ी फ़ारुक़ी

वो ख़ुश-ख़िराम कि बुर्ज-ए-ज़वाल में न मिला

साक़ी फ़ारुक़ी

ख़्वाब को दिन की शिकस्तों का मुदावा न समझ

साक़ी फ़ारुक़ी

दर्द के इताब ले दोस्त उसे शुमार कर

साक़ी फ़ारुक़ी

फ़ज़ा-ए-ज़ेहन की जलती हवा बदलने तक

संजय मिश्रा शौक़

ज़मीं कुछ फ़लक को बताने लगी है

संदीप कोल नादिम

वो गुम हुए हैं मुसाफ़िर रह-ए-तमन्ना में

समद अंसारी

वो आरज़ू कि दिलों को उदास छोड़ गई

समद अंसारी

उतरे तिलिस्म शब के उजालों पे रात-भर

समद अंसारी

पत्थर की नींद सोती है बस्ती जगाइए

समद अंसारी

दस्त-ए-शबनम पे दम-ए-शो'ला-नवाई न रखो

समद अंसारी

आईना-दिल दाग़-ए-तमन्ना के लिए था

समद अंसारी

दुनिया का ज़र्रा ज़र्रा मियाँ इश्क़ इश्क़ है

सलमान ज़फ़र

यूँ भला तुम पर सजा कब आइने में देखना

सलमान सिद्दीक़ी

लब-ए-तनूर

सलमान अंसारी

हिसार-ए-तीरगी

सलमान अंसारी

तआ'क़ुब मेरा ख़ुशबू कर रही थी

सलमा शाहीन

तमाम उम्र की तन्हाइयों पे भारी थी

सलीम शुजाअ अंसारी

पेश-ए-इदराक मिरी फ़िक्र के शाने खुल जाएँ

सलीम शुजाअ अंसारी

तुम्हारी आग में ख़ुद को जलाया था जो इक शब

सालिम सलीम

दालान में कभी कभी छत पर खड़ा हूँ मैं

सालिम सलीम

बदन सिमटा हुआ और दश्त-ए-जाँ फैला हुआ है

सालिम सलीम

वुसअ'त-ए-दामान-ए-दिल को ग़म तुम्हारा मिल गया

सालिक लखनवी

कुछ तग़य्युर मिरे अहवाल-ए-परेशाँ में नहीं

सालिक देहलवी

हूँ पारसा तिरे पहलू में शब गुज़ार के भी

सलीम सिद्दीक़ी

यूँ तिरी चाप से तहरीक-ए-सफ़र टूटती है

सलीम सिद्दीक़ी

मंज़र-ए-ख़ेमा-ए-शब देखने वाला होगा

सलीम सिद्दीक़ी

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