रात Poetry (page 31)

हर एक ख़्वाब सो गया ख़याल जागते रहे

सरवत ज़ेहरा

ज़मानों से दर-ए-इम्कान पर रक्खे हुए हैं

सरवर अरमान

उम्र का कोह-ए-गिराँ और शब-ओ-रोज़ मिरे

सरवत हुसैन

मैं जो गुज़रा सलाम करने लगा

सरवत हुसैन

घर से निकला तो मुलाक़ात हुई पानी से

सरवत हुसैन

फ़ुरात-ए-फ़ासिला से दजला-ए-दुआ से उधर

सरवत हुसैन

हमारे लिए सुब्ह के होंट पर बद-दुआ' है

सरमद सहबाई

मरने का पता दे मिरे जीने का पता दे

सरमद सहबाई

कौन है किस ने पुकारा है सदा कैसे हुई

सरमद सहबाई

फिर ऐसा मोड़ इस क़िस्से में आया

सरफ़राज़ ज़ाहिद

लम्बी है बहुत आज की शब जागने वालो

सरफ़राज़ ख़ालिद

ख़बर है मेरी रुस्वाई की

सरफ़राज़ शाहिद

जिसे तू ने समझा है ज़िंदगी उसी इंक़लाब का नाम है

सरीर काबिरी

तसव्वुरात की दुनिया सजाए बैठे हैं

सरदार सोज़

उन बुतों से रब्त तोड़ा चाहिए

सरदार गेंडा सिंह मशरिक़ी

तुम्हें शब-ए-व'अदा दर्द-ए-सर था ये सब हैं बे-ए'तिबार बातें

सरदार गेंडा सिंह मशरिक़ी

रह कर मकान में मिरे मेहमान जाइए

सरदार गेंडा सिंह मशरिक़ी

नाला शब-ए-फ़िराक़ जो कोई निकल गया

सरदार गेंडा सिंह मशरिक़ी

काली घटा कब आएगी फ़स्ल-ए-बहार में

सरदार गेंडा सिंह मशरिक़ी

जो तुम्हें याद किया करते हैं

सरदार गेंडा सिंह मशरिक़ी

बोसा देते हो अगर तुम मुझ को दो दो सब के दो

सरदार गेंडा सिंह मशरिक़ी

ब-जुज़ साया तन-ए-लाग़र को मेरे कोई क्या समझे

सरदार गेंडा सिंह मशरिक़ी

सोने वालों को क्या ख़बर ऐ हिज्र

साक़िब लखनवी

हिज्र की शब नाला-ए-दिल वो सदा देने लगे

साक़िब लखनवी

आधी से ज़ियादा शब-ए-ग़म काट चुका हूँ

साक़िब लखनवी

यूँ अकेला दश्त-ए-ग़ुर्बत में दिल-ए-नाकाम था

साक़िब लखनवी

वस्ल की उम्मीद बढ़ते बढ़ते थक कर रह गई

साक़िब लखनवी

मैं नहीं कहता कि दुनिया को बदल कर राह चल

साक़िब लखनवी

इबरत-ए-दहर हो गया जब से छुपा मज़ार में

साक़िब लखनवी

हिज्र की शब नाला-ए-दिल वो सदा देने लगे

साक़िब लखनवी

Collection of Hindi Poetry. Get Best Hindi Shayari, Poems and ghazal. Read shayari Hindi, poetry by famous Hindi and Urdu poets. Share poetry hindi on Facebook, Whatsapp, Twitter and Instagram.