शोर Poetry (page 20)

कान पड़ती नहीं आवाज़ कोई

बाक़ी सिद्दीक़ी

वो नज़र आईना-फ़ितरत ही सही

बाक़ी सिद्दीक़ी

वफ़ा के ज़ख़्म हम धोने न पाए

बाक़ी सिद्दीक़ी

क्या पता हम को मिला है अपना

बाक़ी सिद्दीक़ी

आईना क्या किस को दिखाता गली गली हैरत बिकती थी

बाक़र मेहदी

दीवानगी की राह में गुम-सुम हुआ न था!

बाक़र मेहदी

बरसों पढ़ कर सरकश रह कर ज़ख़्मी हो कर समझा मैं

बाक़र मेहदी

पाँव मेरा फिर पड़ा है दश्त में

बलवान सिंह आज़र

तर्सील

बलराज कोमल

शायद

बलराज कोमल

धानी सुरमई सब्ज़ गुलाबी जैसे माँ का आँचल शाम

बद्र वास्ती

रौशनी ही रौशनी है शहर में

बदीउज़्ज़माँ ख़ावर

हाथ खोल दिए जाएँ

अज़रा अब्बास

उस आँख से वहशत की तासीर उठा लाया

अज़्म बहज़ाद

मुझे कल अचानक ख़याल आ गया आसमाँ खो न जाए

अज़्म बहज़ाद

कितने मौसम सरगर्दां थे मुझ से हाथ मिलाने में

अज़्म बहज़ाद

अहद-नामा-ए-इमराेज़

अज़ीज़ क़ैसी

जितने थे रंग हुस्न-ए-बयाँ के बिगड़ गए

अज़ीज़ क़ैसी

मिरा सवाल है ऐ क़ातिलान-ए-शब तुम से

अज़ीज़ नबील

मैं नींद के ऐवान में हैरान था कल शब

अज़ीज़ नबील

अगरचे ज़ेहन के कश्कोल से छलक रहे थे

अज़ीज़ नबील

ज़ंजीर-ए-पा से आहन-ए-शमशीर है तलब

अज़ीज़ हामिद मदनी

ज़रा मुश्किल से समझेंगे हमारे तर्जुमाँ हम को

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

कोई ऐसी बात है जिस के डर से बाहर रहते हैं

अज़हर नक़वी

दिल कुछ देर मचलता है फिर यादों में यूँ खो जाता है

अज़हर नक़वी

देखिए चलता है पैमाना किधर से पहले

अज़हर लखनवी

उस को आदाब बिछड़ने के सिखाता हुआ मैं

अज़हर इनायती

किताबें जब कोई पढ़ता नहीं था

अज़हर इनायती

फ़िक्र में हैं हमें बुझाने की

अज़हर इनायती

किस ने कहा कि चुप हूँ मियाँ बोलता नहीं

अज़हर अब्बास

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