मामला Poetry (page 41)

टपकते शो'लों की बरसात में नहाउँगा

बदनाम नज़र

आग ही काश लग गई होती

बदीउज़्ज़माँ ख़ावर

उन्हें मुझ से शिकायत है

अज़रा नक़वी

क़ुबूल होती हुई बद-दुआ से डरते हैं

अज़लान शाह

अजीब कैफ़ियत आख़िर तलक रही दिल की

अज़ीज़ुर्रहमान शहीद फ़तेहपुरी

सोज़िश-ए-ग़म के सिवा काहिश-ए-फ़ुर्क़त के सिवा

अज़ीज़ वारसी

कहानी

अज़ीज़ तमन्नाई

करते रहे तआ'क़ुब-ए-अय्याम उम्र-भर

अज़ीज़ तमन्नाई

कंफ़ेशन

अज़ीज़ क़ैसी

अहद-नामा-ए-इमराेज़

अज़ीज़ क़ैसी

वालिहाना मिरे दिल में मिरी जाँ में आ जा

अज़ीज़ क़ैसी

जितने थे रंग हुस्न-ए-बयाँ के बिगड़ गए

अज़ीज़ क़ैसी

न जाने कैसी महरूमी पस-ए-रफ़्तार चलती है

अज़ीज़ नबील

आईना छोड़ के देखा किए सूरत मेरी

अज़ीज़ लखनवी

रस्म ऐसों से बढ़ाना ही न था

अज़ीज़ लखनवी

ग़लत है दिल पे क़ब्ज़ा क्या करेगी बे-ख़ुदी मेरी

अज़ीज़ लखनवी

दिल हमारा है कि हम माइल-ए-फ़रियाद नहीं

अज़ीज़ लखनवी

देखता हूँ उन की सूरत देख कर

अज़ीज़ हैदराबादी

अयाँ या निहाँ इक नज़र देख लेते

अज़ीज़ हैदराबादी

क्यूँ ख़फ़ा हो क्यूँ इधर आते नहीं

अज़ीज़ हैदराबादी

वो साअ'त सूरत-ए-चक़माक़ जिस से लौ निकलती है

अज़ीज़ हामिद मदनी

जूयान-ए-ताज़ा-कारी-ए-गुफ़्तार कुछ कहो

अज़ीज़ हामिद मदनी

हवा आशुफ़्ता-तर रखती है हम आशुफ़्ता-हालों को

अज़ीज़ हामिद मदनी

उमीद

अज़ीज़ फ़ैसल

ज़रा मुश्किल से समझेंगे हमारे तर्जुमाँ हम को

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

थकन से चूर हूँ लेकिन रवाँ-दवाँ हूँ मैं

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

पड़ा है ज़िंदगी के इस सफ़र से साबिक़ा अपना

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

निकलना ख़ुद से मुमकिन है न मुमकिन वापसी मेरी

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

ख़ुद में उतरूँगी तो मैं भी लापता हो जाऊँगी

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

किसी बुज़दिल की सूरत घर से ये बाहर निकलता है

अज़हर नवाज़

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