जीवन Poetry (page 59)

हाए कितना लतीफ़ है वो ग़म

चंद्र प्रकाश जौहर बिजनौरी

वो क्या जवाब दे अर्ज़-ए-सवाल से पहले

चंद्र प्रकाश जौहर बिजनौरी

मौत आएगी उस से मिल लेंगे

चमन लाल चमन

हम से यूँ बे-रुख़ी से मिलते हैं

चमन लाल चमन

इक सिलसिला हवस का है इंसाँ की ज़िंदगी

चकबस्त ब्रिज नारायण

हमारा वतन दिल से प्यारा वतन

चकबस्त ब्रिज नारायण

न कोई दोस्त दुश्मन हो शरीक-ए-दर्द-ओ-ग़म मेरा

चकबस्त ब्रिज नारायण

हम सोचते हैं रात में तारों को देख कर

चकबस्त ब्रिज नारायण

फ़ना का होश आना ज़िंदगी का दर्द-ए-सर जाना

चकबस्त ब्रिज नारायण

पास होने का इशारा मिल गया

बबल्स होरा सबा

मिरी ज़िंदगी है तन्हा तुम्हें कुछ असर तो होता

बबल्स होरा सबा

ख़ुशियाँ थीं बेवफ़ा न रहीं ज़िंदगी के साथ

बबल्स होरा सबा

यही समझा हूँ बस इतनी हुई है आगही मुझ को

ब्रहमा नन्द जलीस

मसर्रत को मसर्रत ग़म को जो बस ग़म समझते हैं

ब्रहमा नन्द जलीस

देने वाले ये ज़िंदगी दी है

ब्रहमा नन्द जलीस

ऐ 'जलीस' अब इक तुम्हीं में आदमियत हो तो हो

ब्रहमा नन्द जलीस

कौन समझे इश्क़ की दुश्वारियाँ

बिस्मिल सईदी

कब से उलझ रहे हैं दम-ए-वापसीं से हम

बिस्मिल सईदी

ये ज़िंदगी भी कोई ज़िंदगी हुई 'बिस्मिल'

बिस्मिल अज़ीमाबादी

तंग आ गए हैं क्या करें इस ज़िंदगी से हम

बिस्मिल अज़ीमाबादी

ख़िज़ाँ के जाने से हो या बहार आने से

बिस्मिल अज़ीमाबादी

मिल चुका महफ़िल में अब लुत्फ़-ए-शकेबाई मुझे

बिस्मिल इलाहाबादी

किसी तरह भी किसी से न दिल लगाना था

बिस्मिल इलाहाबादी

जो न करना था किया जो कुछ न होना था हुआ

बिस्मिल इलाहाबादी

ख़याल को ज़ौ नज़र को ताबिश नफ़स को रख़शंदगी मिलेगी

बिर्ज लाल रअना

जब चौदहवीं का चाँद निकलता दिखाई दे

बिमल कृष्ण अश्क

अपनी तो कोई बात बनाए नहीं बनी

बिलक़ीस ज़फ़ीरुल हसन

रिस रहा है मुद्दत से कोई पहला ग़म मुझ में

बिलाल अहमद

सितारे हार चुकी थी सभी जुआरी रात

भवेश दिलशाद

न क़रीब आ न तो दूर जा ये जो फ़ासला है ये ठीक है

भवेश दिलशाद

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