जीवन Poetry (page 58)
क़िस्मत बुरे किसी के न इस तरह लाए दिन
दत्तात्रिया कैफ़ी
जब से किसी से दर्द का रिश्ता नहीं रहा
दरवेश भारती
तुझे क्या ख़बर मिरे हम-सफ़र मिरा मरहला कोई और है
दर्शन सिंह
राज़-ए-निहाँ थी ज़िंदगी राज़-ए-निहाँ है आज भी
दर्शन सिंह
किसी की शाम-ए-सादगी सहर का रंग पा गई
दर्शन सिंह
कब ख़मोशी को मोहब्बत की ज़बाँ समझा था मैं
दर्शन सिंह
इश्क़ शबनम नहीं शरारा है
दर्शन सिंह
हँसी गुलों में सितारों में रौशनी न मिली
दर्शन सिंह
ग़म-ए-हयात पे ख़ंदाँ हैं तेरे दीवाने
दर्शन सिंह
मैं नफ़ी में
दानियाल तरीर
शहर से क्या गई जानिब-ए-दश्त-ए-ज़र ज़िंदगी फ़ाख़्ता
दानियाल तरीर
तेरे फ़िराक़ ने की ज़िंदगी अता मुझ को
दानिश अलीगढ़ी
अगर मैं उन की निगाहों से गिर गया होता
दानिश अलीगढ़ी
बुलंद ज़ीस्त का अपनी वक़ार हो न सका
दामोदर ठाकुर ज़की
हम भी क्या ज़िंदगी गुज़ार गए
दाग़ देहलवी
ये बात बात में क्या नाज़ुकी निकलती है
दाग़ देहलवी
शब-ए-वस्ल ज़िद में बसर हो गई
दाग़ देहलवी
मज़े इश्क़ के कुछ वही जानते हैं
दाग़ देहलवी
दिल-ए-नाकाम के हैं काम ख़राब
दाग़ देहलवी
दिल गया तुम ने लिया हम क्या करें
दाग़ देहलवी
बात मेरी कभी सुनी ही नहीं
दाग़ देहलवी
अजब अपना हाल होता जो विसाल-ए-यार होता
दाग़ देहलवी
नज़रों के गिर्द यूँ तो कोई दायरा न था
डी. राज कँवल
लोग जिन को आज तक बार-ए-गराँ समझा किए
डी. राज कँवल
मचलेंगे उन के आने पे जज़्बात सैंकड़ों
चरख़ चिन्योटी
जो आँसुओं को न चमकाए वो ख़ुशी क्या है
चरख़ चिन्योटी
फ़ज़ा-ए-ना-उमीदी में उमीद-अफ़ज़ा पयाम आया
चरख़ चिन्योटी
फ़ज़ा में कैफ़-फ़शाँ फिर सहाब है साक़ी
चरख़ चिन्योटी
सर उठा के मत चलिए आज के ज़माने में
चरण सिंह बशर
फ़ज़ा-ए-आदमियत को सँवरने ही नहीं देते
चरण सिंह बशर
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