जीवन Poetry (page 77)

एक एहसास

अख़्तर-उल-ईमान

अपाहिज गाड़ी का आदमी

अख़्तर-उल-ईमान

कोई इलाज-ए-ग़म-ए-ज़िंदगी बता वाइज़

अख़्तर ज़ियाई

मिला जो कोई यहाँ रम्ज़-आशना न मुझे

अख़्तर ज़ियाई

शश-जिहत

अख़्तर उस्मान

नए सुर की तमसील

अख़्तर उस्मान

मैं ज़िंदगी के सफ़र में था मश्ग़ला उस का

अख्तर शुमार

ज़रा सी देर थी बस इक दिया जलाना था

अख्तर शुमार

वो जिस का अक्स लहू को जगा दिया करता

अख्तर शुमार

पड़े थे हम भी जहाँ रौशनी में बिखरे हुए

अख्तर शुमार

दिन रात मय-कदे में गुज़रती थी ज़िंदगी

अख़्तर शीरानी

नज़्र-ए-वतन

अख़्तर शीरानी

दिल-ओ-दिमाग़ को रो लूँगा आह कर लूँगा

अख़्तर शीरानी

बस्ती की लड़कियों के नाम

अख़्तर शीरानी

बदनाम हो रहा हूँ

अख़्तर शीरानी

यारो कू-ए-यार की बातें करें

अख़्तर शीरानी

यक़ीन-ए-वादा नहीं ताब-ए-इंतिज़ार नहीं

अख़्तर शीरानी

उस मह-जबीं से आज मुलाक़ात हो गई

अख़्तर शीरानी

मोहब्बत की दुनिया में मशहूर कर दूँ

अख़्तर शीरानी

मैं आरज़ू-ए-जाँ लिखूँ या जान-ए-आरज़ू!

अख़्तर शीरानी

ला पिला साक़ी शराब-ए-अर्ग़वानी फिर कहाँ

अख़्तर शीरानी

अश्क-बारी न मिटी सीना-फ़िगारी न गई

अख़्तर शीरानी

ऐ दिल वो आशिक़ी के फ़साने किधर गए

अख़्तर शीरानी

इक अजब आलम है दिल का ज़िंदगी की राह में

अख्तर सईदी

मुझे अब देखती है ज़िंदगी यूँ बे-नियाज़ाना

अख़्तर सईद ख़ान

किस जुर्म-ए-आरज़ू की सज़ा है ये ज़िंदगी

अख़्तर सईद ख़ान

बहुत क़रीब रही है ये ज़िंदगी हम से

अख़्तर सईद ख़ान

तुम से छुट कर ज़िंदगी का नक़्श-ए-पा मिलता नहीं

अख़्तर सईद ख़ान

तिरी जबीं पे मिरी सुब्ह का सितारा है

अख़्तर सईद ख़ान

सुन रहा हूँ बे-सदा नग़्मा जो मैं बा-चश्म-ए-तर

अख़्तर सईद ख़ान

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