निकासी Poetry (page 10)

है शर्त क़ीमत-ए-हुनर भी अब तो रब्त-ए-ख़ास पर

शाहिदा तबस्सुम

यार भी राह की दीवार समझते हैं मुझे

शाहिद ज़की

तेरी मर्ज़ी के ख़द-ओ-ख़ाल में ढलता हुआ मैं

शाहिद ज़की

मौज आए कोई हल्क़ा-ए-गिर्दाब की सूरत

शाहिद शैदाई

वार हुआ कुछ इतना गहरा पानी का

शाहिद मीर

समुंदरों में अगर ख़लफ़िशार-ए-आब न हो

शाहिद मीर

हाशिए पर कुछ हक़ीक़त कुछ फ़साना ख़्वाब का

शाहिद माहुली

नन्हा सा दिया है कि तह-ए-आब है रौशन

शाहिद कमाल

सीने हैं चाक और गरेबाँ सिले हुए

शाहिद इश्क़ी

साज़-ए-दिल साज़-ए-जुनूँ साज़-ए-वफ़ा कुछ भी नहीं

शाहिद भोपाली

पलकों से अपने भूले हुए ख़्वाब बाँध लें

शाहीन ग़ाज़ीपुरी

ख़ुद अपने ज़हर को पीना बड़ा करिश्मा है

शाहीन ग़ाज़ीपुरी

ये कार-ए-बे-समराँ मुझ से होने वाला नहीं

शहबाज़ ख़्वाजा

शाम रखती है बहुत दर्द से बेताब मुझे

शहाब जाफ़री

इक पल में झड़ी अब्र-ए-तुनक-माया की शेख़ी

शाह नसीर

बजाए आब मय-ए-नर्गिसी पिला मुझ को

शाह नसीर

वाँ कमर बाँधे हैं मिज़्गाँ क़त्ल पर दोनों तरफ़

शाह नसीर

शमीम-ए-ज़ुल्फ़-ए-मुअम्बर जो रू-ए-यार से लूँ

शाह नसीर

सरज़मीन-ए-ज़ुल्फ़ में क्या दिल ठिकाने लग गया

शाह नसीर

न ज़िक्र-ए-आश्ना ने क़िस्सा-ए-बेगाना रखते हैं

शाह नसीर

मिल बैठने ये दे है फ़लक एक दम कहाँ

शाह नसीर

क्यूँ न कहें बशर को हम आतिश-ओ-आब ओ ख़ाक-ओ-बाद

शाह नसीर

ख़ुदा के वास्ते चेहरे से टुक नक़ाब उठा

शाह नसीर

जुदा नहीं है हर इक मौज देख आब के बीच

शाह नसीर

इक क़ाफ़िला है बिन तिरे हम-राह सफ़र में

शाह नसीर

बे-मेहर-ओ-वफ़ा है वो दिल-आराम हमारा

शाह नसीर

है फ़ना बिस्मिल्लाह-ए-दीवान-ए-इश्क़

शाह आसिम

इक तरफ़ तलब तेरी इक तरफ़ ज़माना है

शफ़ीक़ अहमद

मौज-दर-मौज सफ़ीनों से है धारा रौशन

शफ़क़ सुपुरी

मौज-दर-मौज सफ़ीनों से है धारा रौशन

शफ़क़ सुपुरी

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