आसमाँ Poetry (page 10)

एक रौज़न के अभी किरदार में हूँ मैं

सौरभ शेखर

ज़मीं की वुसअ'तों से आसमाँ तक

सत्यपाल जाँबाज़

विसाल

सत्यपाल आनंद

इक निगाह-ए-बेरुख़ी से ग़र्क़ होते ज़ाइक़े

सरवत मुख़तार

जो लोग रह गए हैं मिरी दास्ताँ से दूर

सरवर नेपाली

बहुत मुसिर थे ख़ुदायान-ए-साबित-ओ-सय्यार

सरवत हुसैन

किताब-ए-सब्ज़ ओ दर-ए-दास्तान बंद किए

सरवत हुसैन

गुज़रा हुआ ज़माना फिर याद आ रहा है

सरदार सोज़

बना देगी ज़मीं को आज शायद आसमाँ बारिश

सरदार सलीम

रहता है कब इक रविश पर आसमाँ

सरदार गेंडा सिंह मशरिक़ी

हम सोज़-ए-दिल बयाँ करें तुम से कहाँ तलक

सरस्वती सरन कैफ़

यूँ अकेला दश्त-ए-ग़ुर्बत में दिल-ए-नाकाम था

साक़िब लखनवी

इबरत-ए-दहर हो गया जब से छुपा मज़ार में

साक़िब लखनवी

वो आग हूँ कि नहीं चैन एक आन मुझे

साक़ी फ़ारुक़ी

शबीह-ए-रूह कुछ ऐसे निखार दी गई है

संजय मिश्रा शौक़

हम रूह-ए-काएनात हैं नक़्श-ए-असास हैं

समद अंसारी

मैं तुझ से लाख बिछड़ कर यहाँ वहाँ जाता

सलमान अख़्तर

न छीन ले कहीं तन्हाई डर सा रहता है

सालिम सलीम

कुछ भी नहीं है बाक़ी बाज़ार चल रहा है

सालिम सलीम

बदन सिमटा हुआ और दश्त-ए-जाँ फैला हुआ है

सालिम सलीम

यक़ीन है कि वो मेरी ज़बाँ समझता है

सलीम शहज़ाद

रेत पर मुझ को गुमाँ पानी का था

सलीम शहज़ाद

सुब्ह-ए-सफ़र का राज़ किसी पर यहाँ न खोल

सलीम शाहिद

मत पूछ हर्फ़-ए-दर्द की तफ़्सीर कुछ भी हो

सलीम शाहिद

इन दर-ओ-दीवार की आँखों से पट्टी खोल कर

सलीम शाहिद

कभी सितारे कभी कहकशाँ बुलाता है

सलीम कौसर

बस इक रस्ता है इक आवाज़ और एक साया है

सलीम कौसर

ज़िंदगी

सलाम मछली शहरी

ये धरती ख़ूब-सूरत है

सलाम मछली शहरी

निस्बत वही माह-ए-आसमाँ से

सख़ी लख़नवी

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