आंख Poetry (page 10)
मुद्दत हुई राहत भरा मंज़र नहीं उतरा
सुलेमान ख़ुमार
हया भी आँख में वारफ़्तगी भी
सुलेमान ख़ुमार
नहीं इस दश्त में कोई ख़िज़र है
सुलैमान अहमद मानी
'अंजुम' पे जो गुज़र गई उस का भला हिसाब क्या
सूफ़िया अनजुम ताज
तुम आसमाँ की तरफ़ न देखो
सूफ़ी तबस्सुम
बंद हो जाए मिरी आँख अगर
सूफ़ी तबस्सुम
अगरचे आँख बहुत शोख़ियों की ज़द में रही
सूफ़ी तबस्सुम
आँखें खुली थीं सब की कोई देखता न था
सूफ़ी तबस्सुम
दिल तो रोता रहे ओर आँख से आँसू न बहे
सुदर्शन फ़ाकिर
कुछ तो दुनिया की इनायात ने दिल तोड़ दिया
सुदर्शन फ़ाकिर
किसी रंजिश को हवा दो कि मैं ज़िंदा हूँ अभी
सुदर्शन फ़ाकिर
इन्द्र-धनुष बन जाएँ
सुबोध लाल साक़ी
दुश्मनी में ही सही वो ये करम करता रहा
सुभाष पाठक ज़िया
बढ़ा जो दर्द-ए-जिगर ग़म से दोस्ती कर ली
सुभाष पाठक ज़िया
बहते पानी की तरह मौज-ए-सदा की सूरत
सोज़ नजीबाबादी
इक रौशनी का ज़हर था जो आँख भर गया
सोहन राही
दिया है दर्द तो रंग-ए-क़ुबूल दे ऐसा
सिराज लखनवी
यूँ सुबुक-दोश हूँ जीने का भी इल्ज़ाम नहीं
सिराज लखनवी
ये इंक़लाब भी ऐ दौर-ए-आसमाँ हो जाए
सिराज लखनवी
दुनिया का न उक़्बा का कोई ग़म नहीं सहते
सिराज लखनवी
दाम-ओ-क़फ़स न चाहिए दिल के शिकार कूँ
सिराज औरंगाबादी
सर्व-ए-गुलशन पर सुख़न उस क़द का बाला हो गया
सिराज औरंगाबादी
इस लब कूँ कब पसंद हैं रस्मी कटोरियाँ
सिराज औरंगाबादी
हवस की आँख सीं वो चेहरा-ए-रौशन न देखोगे
सिराज औरंगाबादी
अव्वल सीं दिल मिरा जो गिरफ़्तार था सो है
सिराज औरंगाबादी
दिल में तूफ़ान नहीं आँख में सैलाब नहीं
सिरज़ अालम ज़ख़मी
कहाँ तलक तिरी यादों से तख़लिया कर लें
सिरज़ अालम ज़ख़मी
वीराँ बहुत है ख़्वाब-महल जागते रहो
सिराज अजमली
जनम-कदे में ना-जाएज़ आँखें
सिदरा सहर इमरान
असबाब-ए-हस्त रह में लुटाना पड़ा मुझे
सिदरा सहर इमरान
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