बात Poetry (page 26)

हर नफ़स दीदा-ए-दिल में तिरी यादों का हुजूम

शकूर जावेद

बे-पर्दा उस का चेहरा-ए-पुर-नूर तो हुआ

शाकिर कलकत्तवी

शोख़ मासूम सी अल्लहड़ वो कुँवारी बातें

शकीला बानो

जो शख़्स मुद्दतों मिरे शैदाइयों में था

शकीला बानो

ज़िंदगी यूँ तो बहुत अय्यार थी चालाक थी

शकील शम्सी

बादशाहों की तरह और न वज़ीरों की तरह

शकील शम्सी

थोड़ा सा माहौल बनाना होता है

शकील जमाली

कोई भी दार से ज़िंदा नहीं उतरता है

शकील जमाली

किसी का साथ मियाँ जी सदा नहीं रहा है

शकील जमाली

अब बंद जो इस अब्र-ए-गुहर-बार को लग जाए

शकील जमाली

ये दिल हर इक नई कोशिश पे यूँ धड़कता है

शकील ग्वालिआरी

ख़्वाबों की रहगुज़र से ख़यालों की राह से

शकील ग्वालिआरी

आज उस बज़्म में यूँ दाद-ए-वफ़ा दी जाए

शकील ग्वालिआरी

यूँ तो हर शाम उमीदों में गुज़र जाती है

शकील बदायुनी

वो हम से ख़फ़ा हैं हम उन से ख़फ़ा हैं

शकील बदायुनी

पी शौक़ से वाइज़ अरे क्या बात है डर की

शकील बदायुनी

कल रात ज़िंदगी से मुलाक़ात हो गई

शकील बदायुनी

कैसे कह दूँ कि मुलाक़ात नहीं होती है

शकील बदायुनी

काफ़ी है मिरे दिल की तसल्ली को यही बात

शकील बदायुनी

जाने वाले से मुलाक़ात न होने पाई

शकील बदायुनी

छुपे हैं लाख हक़ के मरहले गुम-नाम होंटों पर

शकील बदायुनी

ज़लज़ला

शकील बदायुनी

तक़दीर की गर्दिश क्या कम थी इस पर ये क़यामत कर बैठे

शकील बदायुनी

शोख़ नज़रों में जो शामिल बरहमी हो जाएगी

शकील बदायुनी

सरगुज़िश्त-ए-दिल को रूदाद-ए-जहाँ समझा था मैं

शकील बदायुनी

न पैमाने खनकते हैं न दौर-ए-जाम चलता है

शकील बदायुनी

मिरी ज़िंदगी है ज़ालिम तिरे ग़म से आश्कारा

शकील बदायुनी

ख़ुश हूँ कि मिरा हुस्न-ए-तलब काम तो आया

शकील बदायुनी

कैसे कह दूँ की मुलाक़ात नहीं होती है

शकील बदायुनी

जुनूँ से गुज़रने को जी चाहता है

शकील बदायुनी

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