दूर Poetry (page 65)

नींद

अशोक लाल

तिरी नज़र के इशारे बदल भी सकते हैं

अशफ़ाक़ रशीद मंसूरी

लगा हो दिल तो ख़यालात कब बदलते हैं

अशफ़ाक़ आमिर

हो गई अपनों की ज़ाहिर दुश्मनी अच्छा हुआ

असग़र वेलोरी

मोहब्बत की नज़्म

असग़र नदीम सय्यद

दम तोड़ती है शाम की नीली हवा

असग़र नदीम सय्यद

आज तुम ऐसे हँसे

असग़र नदीम सय्यद

आने वाले दौर में जो पाएगा पैग़म्बरी

असग़र मेहदी होश

सराए

असग़र मेहदी होश

आए थे घर में आग लगाने शरीर लोग

असग़र मेहदी होश

हम दश्त से हर शाम यही सोच के घर आए

असग़र गोरखपुरी

इश्क़ है इक कैफ़-ए-पिन्हानी मगर रंजूर है

असग़र गोंडवी

जाने लगे हैं अब दम-ए-सर्द आसमाँ तलक

असीर लखनवी

लुत्फ़ गुनाह में मिला और न मज़ा सवाब में

असर सहबाई

सना तेरी नहीं मुमकिन ज़बाँ से

असर लखनवी

मुझ को हर फूल सुनाता था फ़साना तेरा

असर लखनवी

दिल इश्क़ की मय से छलक रहा है

असर लखनवी

चुपके से नाम ले के तुम्हारा कभी कभी

असर लखनवी

आह से जब दिल में डूबे तीर उभारे जाएँगे

असर लखनवी

जो बज़्म-ए-दहर में कल तक थे ख़ुद-सरों की तरह

असद जाफ़री

तुम दूर हो तो प्यार का मौसम न आएगा

असद भोपाली

गिराँ गुज़रने लगा दौर-ए-इंतिज़ार मुझे

असद भोपाली

जो लोग रातों को जागते थे

असअ'द बदायुनी

यूँ दूर दूर दिल से हो हो के दिल-नशीं भी

आरज़ू लखनवी

क़ुर्बत बढ़ा बढ़ा कर बे-ख़ुद बना रहे हैं

आरज़ू लखनवी

न कर तलाश-ए-असर तीर है लगा न लगा

आरज़ू लखनवी

कहीं सर पटकते दीवाने कहीं पर झुलसते परवाने

आरज़ू लखनवी

हुस्न से शरह हुई इश्क़ के अफ़्साने की

आरज़ू लखनवी

ऐ मिरे ज़ख़्म-ए-दिल-नवाज़ ग़म को ख़ुशी बनाए जा

आरज़ू लखनवी

आने में झिझक मिलने में हया तुम और कहीं हम और कहीं

आरज़ू लखनवी

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