दूर Poetry (page 63)

ख़ुलूस-ए-नियत-ए-रहबर पे मुनहसिर है 'अज़ीम'

अज़ीम मुर्तज़ा

ये और बात है कि मदावा-ए-ग़म न था

अज़ीम मुर्तज़ा

तेरा ख़याल भी है वज़-ए-ग़म का पास भी है

अज़ीम मुर्तज़ा

तिरा ख़याल भी है वज़-ए-ग़म का पास भी है

अज़ीम मुर्तज़ा

कभी नाकामियों का अपनी हम मातम नहीं करते

आज़ाद गुरदासपुरी

वो रूह के गुम्बद में सदा बन के मिलेगा

आज़ाद गुलाटी

तुम्हारे पास रहें हम तो मौत भी क्या है

आज़ाद गुलाटी

ख़ुद हमीं को राहतों के कैफ़ का चसका न था

आज़ाद गुलाटी

ये रहबर आज भी कितने पुराने लगते हैं

अतुल अजनबी

वो

अतीक़ुल्लाह

मैं ख़ुद से दूर था और मुझ से दूर था वो भी

अतीक़ुल्लाह

मैं जो ठहरा ठहरता चला जाऊँगा

अतीक़ुल्लाह

बहुत दिनों में कहीं रास्ते बदलते थे

अतीक़ुल्लाह

वो दौर क़रीब आ रहा है

अतहर नफ़ीस

मैं तेरे क़रीब आते आते

अतहर नफ़ीस

वो दौर क़रीब आ रहा है

अतहर नफ़ीस

लम्हों के अज़ाब सह रहा हूँ

अतहर नफ़ीस

फ़र्ज़ानों की इस बस्ती में एक अजब सौदाई है

अतहर नफ़ीस

करता मैं अब किसी से कोई इल्तिमास क्या

अतहर नादिर

काश समझदार न बनूँ

अतीया दाऊद

जीवन-भर की आस है तू

अतीक़ुर्रहमान सफ़ी

दिल लगाना चाहिए चल कर किसी हैवान से

अतीक़ मुज़फ़्फ़रपुरी

मिरे दिल में ख़ुश्बू बसी थी जो वो मकान अपना बदल गई

अतीक़ अंज़र

अश्क इन आँखों से हम दिल में बहा कर देखें

अतीक़ अंज़र

कुछ ख़्वाब कुछ ख़याल में मस्तूर हो गए

अताउर्रहमान जमील

ज़िंदगी आईना है आईना-आराई है

अता शाद

शम-ए-रह-गुज़र

असरार-उल-हक़ मजाज़

साक़ी

असरार-उल-हक़ मजाज़

रात और रेल

असरार-उल-हक़ मजाज़

नूरा

असरार-उल-हक़ मजाज़

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