दर्द Poetry (page 33)

वो कौन है दुनिया में जिसे ग़म नहीं होता

रियाज़ ख़ैराबादी

सितम-ए-ना-रवा को रोते हैं

रियाज़ ख़ैराबादी

ले गया घर से उन्हें ग़ैर के घर का ता'वीज़

रियाज़ ख़ैराबादी

कोई मुँह चूम लेगा इस नहीं पर

रियाज़ ख़ैराबादी

ख़्वाब में भी नज़र आ जाए जो घर की सूरत

रियाज़ ख़ैराबादी

जफ़ा में नाम निकालो न आसमाँ की तरह

रियाज़ ख़ैराबादी

जाने वाले न हम उस कूचे में आने वाले

रियाज़ ख़ैराबादी

ग़रीब हम हैं ग़रीबों की भी ख़ुशी हो जाए

रियाज़ ख़ैराबादी

सर-ए-राह इक हादिसा हो गया

ऋषि पटियालवी

हर एक जिस्म पे बस एक ही से गहने लगे

रिन्द साग़री

ज़माने में वो मह-लक़ा एक है

रिन्द लखनवी

वक़ार-ए-शाह-ए-ज़विल-इक्तदार देख चुके

रिन्द लखनवी

हैं ये सारे जीते-जी के वास्ते

रिन्द लखनवी

क्यूँ अंधेरों का मुसाफ़िर है मुक़द्दर अपना

रिफ़अतुल क़ासमी

कहाँ पे लाई है मेरी ख़ुदी कहाँ से मुझे

रिफ़अतुल क़ासमी

सफ़र-ए-ज़िंदगी नहीं आसाँ

रिफ़अत सुलतान

ना-आश्ना-ए-दर्द नहीं बेवफ़ा नहीं

रिफ़अत सुलतान

जो रिवायात भूल जाते हैं

रिफ़अत सुलतान

शहर-ए-शोर-ओ-शर तन्हा घर के बाम-ओ-दर तन्हा

रिफ़अत सरोश

न फूल हूँ न सितारा हूँ और न शो'ला हूँ

रिफ़अत सरोश

न कोई दोस्त न दुश्मन अजीब दुनिया है

रिफ़अत सरोश

दीबाचा-ए-किताब-ए-वफ़ा है तमाम उम्र

रिफ़अत सरोश

सिमटती फैलती तन्हाई सोते जागते दर्द

रियाज़ मजीद

जो सैल-ए-दर्द उठा था वो जान छोड़ गया

रियाज़ मजीद

उस चाँद को तुम दिल में छुपा क्यूँ नहीं लेते

रियाज़ हान्स

ज़ियादा पास मत आना

रहमान फ़ारिस

इक सहीफ़ा नया उतरा है सुना है लोगो

रज़िया फ़सीह अहमद

दिल तो है एक मगर दर्द के ख़ाने हैं बहुत

रज़िया फ़सीह अहमद

दिल के दर्द के कम होने का तन्हा कुछ सामान हुआ

रज़िया फ़सीह अहमद

शब का सफ़र

रज़ी रज़ीउद्दीन

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