नदी Poetry (page 44)

रास्ता कोई सफ़र कोई मसाफ़त कोई

असअ'द बदायुनी

जिसे न मेरी उदासी का कुछ ख़याल आया

असअ'द बदायुनी

बिछड़ के तुझ से किसी दूसरे पे मरना है

असअ'द बदायुनी

बड़े नादान थे हम रेत को आब-ए-रवाँ समझे

असअ'द बदायुनी

अजब दिन थे कि इन आँखों में कोई ख़्वाब रहता था

असअ'द बदायुनी

अभी ज़मीन को सौदा बहुत सरों का है

असअ'द बदायुनी

यूँ दूर दूर दिल से हो हो के दिल-नशीं भी

आरज़ू लखनवी

क्यूँ किसी रह-रौ से पूछूँ अपनी मंज़िल का पता

आरज़ू लखनवी

यक़ीन-ए-सुब्ह-ए-चमन है कितना शुऊर-ए-अब्र-ए-बहार क्या है

अर्शी भोपाली

दर्द के साँचे में ढल कर रह गई

अर्शी भोपाली

ये माना सैल-ए-अश्क-ए-ग़म नहीं कुछ कम मगर 'अरशद'

अरशद कमाल

नफ़ी ओ इसबात

अरशद कमाल

तलातुम है न जाँ-लेवा भँवर है

अरशद कमाल

सच की ख़ातिर सब कुछ खोया कौन लिखेगा

अरशद कमाल

कभी अंगड़ाई ले कर जब समुंदर जाग उठता है

अरशद कमाल

किश्त-ए-एहसास में थोड़ा सा मिला लेंगे तुझे

अरशद जमाल 'सारिम'

दो-चार सितारे ही मिरी आँख में धर जा

अरशद जमाल 'सारिम'

ख़्वाब क्या है कि टूटता ही नहीं

अरशद जमाल हश्मी

तासीर जज़्ब मस्तों की हर हर ग़ज़ल में है

अरशद अली ख़ान क़लक़

सोते हैं फैल फैल के सारे पलंग पर

अरशद अली ख़ान क़लक़

आश्ना होते ही उस इश्क़ ने मारा मुझ को

अरशद अली ख़ान क़लक़

मिरे ख़ेमे ख़स्ता-हाल में हैं मिरे रस्ते धुँद के जाल में हैं

अरशद अब्दुल हमीद

इश्क़ मरहून-ए-हिकायात-ओ-गुमाँ भी होगा

अरशद अब्दुल हमीद

फ़सील-ए-सब्र में रौज़न बनाना चाहती है

अरशद अब्दुल हमीद

क्या साथ तिरा दूँ कि मैं इक मौज-ए-हवा हूँ

अर्श सिद्दीक़ी

मेरे प्यारे वतन

अर्श मलसियानी

बाग़बाँ की बे-रुख़ी से नीले-पीले हो गए

आरिफ़ अंसारी

रूह के जलते ख़राबे का मुदावा भी नहीं

आरिफ़ अब्दुल मतीन

मैं जिस को राह दिखाऊँ वही हटाए मुझे

आरिफ़ अब्दुल मतीन

मैं अज़ल का राह-रौ मुझ को अबद की जुस्तुजू

आरिफ़ अब्दुल मतीन

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