देख Poetry (page 63)

खुलता नहीं कि हम में ख़िज़ाँ-दीदा कौन है

अज़्म बहज़ाद

बाक़ीस्त शब-ए-फ़ित्ना

अज़ीज़ क़ैसी

आईने से

अज़ीज़ क़ैसी

लज़्ज़त-ए-ग़म

अज़ीज़ लखनवी

ये ग़लत है ऐ दिल-ए-बद-गुमाँ कि वहाँ किसी का गुज़र नहीं

अज़ीज़ लखनवी

दुनिया को वलवला दिल-ए-नाशाद से हुआ

अज़ीज़ लखनवी

दिल हमारा है कि हम माइल-ए-फ़रियाद नहीं

अज़ीज़ लखनवी

धड़कते हुए दिल के हम-राह मेरे

अज़ीज़ हैदराबादी

देखता हूँ उन की सूरत देख कर

अज़ीज़ हैदराबादी

अयाँ या निहाँ इक नज़र देख लेते

अज़ीज़ हैदराबादी

क्यूँ ख़फ़ा हो क्यूँ इधर आते नहीं

अज़ीज़ हैदराबादी

हवा आशुफ़्ता-तर रखती है हम आशुफ़्ता-हालों को

अज़ीज़ हामिद मदनी

ख़ुद में उतरूँगी तो मैं भी लापता हो जाऊँगी

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

हम उस को भूल बैठे हैं अँधेरे हम पे तारी हैं

अज़ीज़ अन्सारी

दुनिया के जंजाल न पूछ

अज़ीज़ अन्सारी

ज़ौक़-ए-अमल के सामने दूरी सिमट गई

अज़ीज अहमद ख़ाँ शफ़क़

ज़मीं की ख़ाक तो अफ़्लाक से ज़ियादा है

अज़ीम हैदर सय्यद

जल्वे हवा के दोश ये कोई घटा के देख

अज़हर लखनवी

तू भी वफ़ा के रूप में अब ढल के देख ले

अज़हर जावेद

तू भी वफ़ा के रूप में अब ढल के देख ले

अज़हर जावेद

सब देख कर गुज़र गए इक पल में और हम

अज़हर इनायती

तिरे तक़ाज़ों पे चेहरे बदल रहा हूँ मैं

अज़हर इनायती

रंगतें मासूम चेहरों की बुझा दी जाएँगी

अज़हर इनायती

इस हादसे को देख के आँखों में दर्द है

अज़हर इनायती

इस बार उन से मिल के जुदा हम जो हो गए

अज़हर इनायती

वो दस्तियाब हमें इस लिए नहीं होता

अज़हर फ़राग़

बदल के देख चुकी है रेआया साहिब-ए-तख़्त

अज़हर फ़राग़

कोई सिलसिला नहीं जावेदाँ तिरे साथ भी तिरे बा'द भी

अज़हर फ़राग़

भँवर से ये जो मुझे बादबान खींचता है

अज़हर फ़राग़

भँवर से ये जो मुझे बादबान खींचता है

अज़हर फ़राग़

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