दिल Poetry (page 112)

दिल जल्वा-गाह-ए-सूरत-ए-जानाना हो गया

शाह नसीर

दिल इश्क़-ए-ख़ुश-क़दाँ में जो ख़्वाहान-ए-नाला था

शाह नसीर

देख तू यार-ए-बादा-कश! मैं ने भी काम क्या किया

शाह नसीर

दम ले ऐ कोहकन अब तेशा-ज़नी ख़ूब नहीं

शाह नसीर

छोड़ा न तुझे ने राम क्या ये भी न हुआ वो भी न हुआ

शाह नसीर

चश्म में कब अश्क भर लाते हैं हम

शाह नसीर

बे-सबब हाथ कटारी को लगाना क्या था

शाह नसीर

बे-मेहर-ओ-वफ़ा है वो दिल-आराम हमारा

शाह नसीर

बयाबाँ मर्ग है मजनून-ए-ख़ाक-आलूदा-तन किस का

शाह नसीर

क्या कहूँ कब धुआँ नहीं उठता

शाह हुसैन नहरी

ये किस के सोज़ का है बज़्म-ए-जाँ में इंतिज़ार ऐ दिल

शाह दीन हुमायूँ

क्यूँ मुश्त-ए-ख़ाक पर कोई दिल दाग़दार हो

शाह दीन हुमायूँ

उट्ठी है जब से दिल में मिरे इश्क़ की तरंग

शाह आसिम

सुब्हा से है न काम न ज़ुन्नार से ग़रज़

शाह आसिम

शक्ल-ए-जानाना जा-ब-जा हैं हम

शाह आसिम

सन लेवे अगर तू मिरी दिलदार की आवाज़

शाह आसिम

क़ैद-ए-दिल से है मिरी काकुल-ए-पेचाँ नाज़ाँ

शाह आसिम

मुझे साक़ी-ए-चश्म-ए-यार ने अजब एक जाम पिला दिया

शाह आसिम

लश्कर-ए-इश्क़ आ पड़ा है मुल्क-ए-दिल पर टूट टूट

शाह आसिम

कोई दम थमता नहीं बारान-ए-अश्क

शाह आसिम

इश्क़ के अक़्लीम में चाल-ओ-चलन कुछ और है

शाह आसिम

इस दिल में अगर जल्वा-ए-दिल-दार न होता

शाह आसिम

है फ़ना बिस्मिल्लाह-ए-दीवान-ए-इश्क़

शाह आसिम

है दिल को मेरे आरिज़-ए-जानाँ से इर्तिबात

शाह आसिम

है अयाँ रू-ए-यार आँखों में

शाह आसिम

दस्तियाब उस को हुआ जब से है गुल-दस्ता-ए-दाग़

शाह आसिम

बंदा-ए-इश्क़ हूँ जुज़ यार मुझे काम नहीं

शाह आसिम

ब-चशम-ए-हक़ीक़त जहाँ देखता हूँ

शाह आसिम

अफ़्साना मिरे दिल का दिल-आज़ार से कह दो

शाह आसिम

आशिक़-ए-ज़ार हूँ जुज़ इश्क़ मुझे काम नहीं

शाह आसिम

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