दिल Poetry (page 122)

बदन से रूह रुख़्सत हो रही है

सीमाब अकबराबादी

अज़्म-ए-फ़रियाद! उन्हें ऐ दिल-ए-नाशाद नहीं

सीमाब अकबराबादी

अंजाम हर इक शय का ब-जुज़ ख़ाक नहीं है

सीमाब अकबराबादी

अब क्या बताऊँ मैं तिरे मिलने से क्या मिला

सीमाब अकबराबादी

अब ऐ बे-दर्द क्या इस के लिए इरशाद होता है

सीमाब अकबराबादी

आ कि हस्ती बे-लब-ओ-बे-जोश है तेरे बग़ैर

सीमाब अकबराबादी

आ अपने दिल में मेरी तमन्ना लिए हुए

सीमाब अकबराबादी

सूरज की तपती धूप ने मारा है इन दिनों

सीमा शर्मा मेरठी

सुनी न दश्त या दरिया की भी कभी मैं ने

सीमा शर्मा मेरठी

रोज़ इक रास्ता बदलता है

सीमा शर्मा मेरठी

पूछ मत कल आइने में क्या हुआ

सीमा शर्मा मेरठी

मेरे ख़तों को जलाने से कुछ नहीं होगा

सीमा शर्मा मेरठी

हक़ीक़त ज़ीस्त की समझा नहीं है

सीमा शर्मा मेरठी

बताओ मौत क्या है ज़िंदगी क्या

सीमा शर्मा मेरठी

नज़र में अर्श-ए-बरीं है किसी को क्या मालूम

सीमा शकीब

एक बस तू नहीं मिलता है मुझे खोने को

सीमा नक़वी

हमारे सानेहे हम को सुना रहे क्यूँ हो

सीमा ग़ज़ल

इक क़यामत का घाव आँखें थीं

सीमा ग़ज़ल

फूलों को शर्मसार किया है कभी कभी

सय्यद जहीरुद्दीन ज़हीर

लज़्ज़त-ए-दर्द-ए-अलम ही से सुकूँ आ जाए है

सय्यद जहीरुद्दीन ज़हीर

इश्क़ है दरिया-ए-आतिश तैर कर जाने का नाम

सय्यद जहीरुद्दीन ज़हीर

अपनी जौलाँ-गाह ज़ेर-ए-आसमाँ समझा था मैं

सय्यद जहीरुद्दीन ज़हीर

क्या बतलाएँ याद नहीं कब इश्क़ के हम बीमार हुए

सय्यद नुसरत ज़ैदी

शम्अ' रौशन कोई कर दे मिरे ग़म-ख़ाने में

सय्यद एजाज़ अहमद रिज़वी

मुझे मुश्किल में यूँ अंदाज़ा-ए-मुश्किल नहीं होता

सय्यद एजाज़ अहमद रिज़वी

कुछ भी न अब कहेंगे क़फ़स में ज़बाँ से हम

सय्यद एजाज़ अहमद रिज़वी

कुछ भी न अब कहेंगे क़फ़स में ज़बाँ से हम

सय्यद एजाज़ अहमद रिज़वी

कभी तो इश्क़ में उन के सदाक़त आ ही जाएगी

सय्यद एजाज़ अहमद रिज़वी

जिगर के ख़ून से रौशन गो ये चराग़ रहा

सय्यद एजाज़ अहमद रिज़वी

रस्म ही शहर-ए-तमन्ना से वफ़ा की उठ जाए

सय्यद एहतिशाम हुसैन

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