दिल Poetry (page 124)

'सौदा' हुए जब आशिक़ क्या पास आबरू का

मोहम्मद रफ़ी सौदा

साक़ी गई बहार रही दिल में ये हवस

मोहम्मद रफ़ी सौदा

न कर 'सौदा' तू शिकवा हम से दिल की बे-क़रारी का

मोहम्मद रफ़ी सौदा

मैं ने तुम को दिल दिया और तुम ने मुझे रुस्वा किया

मोहम्मद रफ़ी सौदा

जब यार ने उठा कर ज़ुल्फ़ों के बाल बाँधे

मोहम्मद रफ़ी सौदा

गर तुझ में है वफ़ा तो जफ़ाकार कौन है

मोहम्मद रफ़ी सौदा

आदम का जिस्म जब कि अनासिर से मिल बना

मोहम्मद रफ़ी सौदा

यूँ देख मिरे दीदा-ए-पुर-आब की गर्दिश

मोहम्मद रफ़ी सौदा

या रब कहीं से गर्मी-ए-बाज़ार भेज दे

मोहम्मद रफ़ी सौदा

वे सूरतें इलाही किस मुल्क बस्तियाँ हैं

मोहम्मद रफ़ी सौदा

तुझ क़ैद से दिल हो कर आज़ाद बहुत रोया

मोहम्मद रफ़ी सौदा

तुझ इश्क़ के मरीज़ की तदबीर शर्त है

मोहम्मद रफ़ी सौदा

सदमा हर-चंद तिरे जौर से जाँ पर आया

मोहम्मद रफ़ी सौदा

ने ग़रज़ कुफ़्र से रखते हैं न इस्लाम से काम

मोहम्मद रफ़ी सौदा

नासेह को जेब सीने से फ़ुर्सत कभू न हो

मोहम्मद रफ़ी सौदा

मस्त-ए-सहर ओ तौबा-कुनाँ शाम का हूँ मैं

मोहम्मद रफ़ी सौदा

मक़्दूर नहीं उस की तजल्ली के बयाँ का

मोहम्मद रफ़ी सौदा

मगर वो दीद को आया था बाग़ में गुल के

मोहम्मद रफ़ी सौदा

ले दीदा-ए-तर जिधर गए हम

मोहम्मद रफ़ी सौदा

किस के हैं ज़ेर-ए-ज़मीं दीदा-ए-नम-नाक हनूज़

मोहम्मद रफ़ी सौदा

कीजिए न असीरी में अगर ज़ब्त नफ़स को

मोहम्मद रफ़ी सौदा

करता हूँ तेरे ज़ुल्म से हर बार अल-ग़ियास

मोहम्मद रफ़ी सौदा

कब दिल शिकस्त-गाँ से कर अर्ज़-ए-हाल आया

मोहम्मद रफ़ी सौदा

जो गुज़री मुझ पे मत उस से कहो हुआ सो हुआ

मोहम्मद रफ़ी सौदा

जो गुल है याँ सो उस गुल-ए-रुख़्सार साथ है

मोहम्मद रफ़ी सौदा

जिस दम वो सनम सवार होवे

मोहम्मद रफ़ी सौदा

जब यार ने उठा कर ज़ुल्फ़ों के बाल बाँधे

मोहम्मद रफ़ी सौदा

जब नज़र उस की आन पड़ती है

मोहम्मद रफ़ी सौदा

हिन्दू हैं बुत-परस्त मुसलमाँ ख़ुदा-परस्त

मोहम्मद रफ़ी सौदा

हस्ती को तिरी बस है मियाँ गुल की इशारत

मोहम्मद रफ़ी सौदा

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