दिल Poetry (page 125)

हर संग में शरार है तेरे ज़ुहूर का

मोहम्मद रफ़ी सौदा

ग़ुंचे से मुस्कुरा के उसे ज़ार कर चले

मोहम्मद रफ़ी सौदा

गर तुझ में है वफ़ा तो जफ़ाकार कौन है

मोहम्मद रफ़ी सौदा

दीं शैख़ ओ बरहमन ने किया यार फ़रामोश

मोहम्मद रफ़ी सौदा

दिलदार उस को ख़्वाह दिल-आज़ार कुछ कहो

मोहम्मद रफ़ी सौदा

दिल में तिरे जो कोई घर कर गया

मोहम्मद रफ़ी सौदा

दिल मत टपक नज़र से कि पाया न जाएगा

मोहम्मद रफ़ी सौदा

देखे बुलबुल जो यार की सूरत

मोहम्मद रफ़ी सौदा

दामन सबा न छू सके जिस शह-सवार का

मोहम्मद रफ़ी सौदा

चेहरे पे न ये नक़ाब देखा

मोहम्मद रफ़ी सौदा

बे-वज्ह नईं है आइना हर बार देखना

मोहम्मद रफ़ी सौदा

बेचैन जो रखती है तुम्हें चाह किसू की

मोहम्मद रफ़ी सौदा

बरहमन बुत-कदे के शैख़ बैतुल्लाह के सदक़े

मोहम्मद रफ़ी सौदा

बार-हा दिल को मैं समझा के कहा क्या क्या कुछ

मोहम्मद रफ़ी सौदा

बहार-ए-बाग़ हो मीना हो जाम-ए-सहबा हो

मोहम्मद रफ़ी सौदा

बातिल है हम से दावा शायर को हम-सरी का

मोहम्मद रफ़ी सौदा

अपने का है गुनाह बेगाने ने क्या किया

मोहम्मद रफ़ी सौदा

ऐ दीदा ख़ानुमाँ तू हमारा डुबो सका

मोहम्मद रफ़ी सौदा

आशिक़ की भी कटती हैं क्या ख़ूब तरह रातें

मोहम्मद रफ़ी सौदा

आराम फिर कहाँ है जो हो दिल में जा-ए-हिर्स

मोहम्मद रफ़ी सौदा

आदम का जिस्म जब कि अनासिर से मिल बना

मोहम्मद रफ़ी सौदा

ये तो दुनिया भी नहीं है कि किनारा कर ले

सऊद उस्मानी

शाम से गहरा चाँद से उजला एक ख़याल

सऊद उस्मानी

नज़र के भेद सब अहल-ए-नज़र समझते हैं

सऊद उस्मानी

हिसाब-ए-तर्क-तअल्लुक़ तमाम मैं ने किया

सऊद उस्मानी

गुज़र चली है शब-ए-दिल-फ़िगार आख़िरी बार

सऊद उस्मानी

दीवार पे रक्खा हुआ मिट्टी का दिया मैं

सऊद उस्मानी

दिल में रक्खे हुए आँखों में बसाए हुए शख़्स

सऊद उस्मानी

बिछड़ गया है तो अब उस से कुछ गिला भी नहीं

सऊद उस्मानी

बादल की तरह रंज-फ़िशानी करें हम भी

सऊद उस्मानी

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