दिल Poetry (page 151)

ग़ुरूब होते हुए दो सितारे आँखों में

सफ़दर सिद्दीक़ रज़ी

हुजूम-ए-यास में माँ की दुआ मिलती रही है

सफ़दर सलीम सियाल

दीदा-ओ-दिल मिरी सरकार उठा लाए हैं

सफ़दर सलीम सियाल

रात कितनी बोझल है किस क़दर अँधेरा है

सफ़दर मीर

फिर कोई आ रहा है दिल के क़रीब

सफ़दर मीर

ओस की तमन्ना में जैसे बाग़ जलता है

सफ़दर मीर

चारों ओर अब फूल ही फूल हैं क्या गिनते हो दाग़ों को

सफ़दर मीर

बहुत जी तरसता रहा रात भर

सफ़दर मीर

बग़ौर देखो तो ज़ख़्मों का इक चमन सा है

सफ़दर मीर

तिनका

सईदुद्दीन

जब तेज़ भूक लगी हो

सईदुद्दीन

एक दरख़्त की दहशत

सईदुद्दीन

अपनी खोई हुई तौक़ीर नुमायाँ कर दें

सईदा जहाँ मख़्फ़ी

साँस की धार ज़रा घुसती ज़रा काटती है

सईद शरीक़

वो बे-गुनाही हमारी मुआफ़ करता है

सईद शबाब

नहीं है ये तिरा कूचा नहीं है

सईद राही

इतना तो हुआ ऐ दिल इक शख़्स के जाने से

सईद राही

उज़्र हवा ने क्या रक्खा है

सईद क़ैस

सोने के दिल मिट्टी के घर पीछे छोड़ आए हैं

सईद क़ैस

पहले तो जस्ता जस्ता भूल गया

सईद नक़वी

चाहे हमारा ज़िक्र किसी भी ज़बाँ में हो

सईद नक़वी

ख़ुश्क होंटों की अना माइल-ए-साग़र क्यूँ है

सईद आरिफ़ी

ख़ुदी मेरा पता देती है अब भी

सईद आरिफ़ी

बे-सबब ठीक नहीं घर से निकल कर जाना

सईद आरिफ़ी

पहले वो क़ैद-ए-मर्ग से मुझ को रिहा करे

सईद अख़्तर

सफ़र ला सफ़र

सईद अहमद

बद-गुमान

सईद अहमद

वही ख़राबा-ए-इम्काँ वही सिफ़ाल-ए-क़दीम

सईद अहमद

खुलता है यूँ हवा का दरीचा समझ लिया

सईद अहमद

इक बर्ग-ए-ख़ुश्क से गुल-ए-ताज़ा तक आ गए

सईद अहमद

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