दिल Poetry (page 152)

अदू से शिकवा-ए-क़ैद-ओ-क़फ़स क्या

सईद आसिम

उश्शाक़ जाँ-ब-कफ़ खड़े हैं तेरे आस-पास

सदरुद्दीन मोहम्मद फ़ाएज़

तुझ को है हम से जुदाई आरज़ू

सदरुद्दीन मोहम्मद फ़ाएज़

करे रश्क-ए-गुलिस्ताँ दिल को 'फ़ाएज़'

सदरुद्दीन मोहम्मद फ़ाएज़

ज़ुल्फ़ तेरी हुई कमंद मुझे

सदरुद्दीन मोहम्मद फ़ाएज़

तिरी गाली मुझ दिल को प्यारी लगे

सदरुद्दीन मोहम्मद फ़ाएज़

पेच भाया मुझ को तुझ दस्तार का

सदरुद्दीन मोहम्मद फ़ाएज़

मिरा महबूब सब का मन हरन है

सदरुद्दीन मोहम्मद फ़ाएज़

मरे दिल बीच नक़्श-ए-नाज़नीं है

सदरुद्दीन मोहम्मद फ़ाएज़

चौधवाँ उस चंदर का साल हुआ

सदरुद्दीन मोहम्मद फ़ाएज़

ऐ ख़ूब-रू फ़रिश्ता सियर-अंजुमन में आ

सदरुद्दीन मोहम्मद फ़ाएज़

दुरून-ए-चश्म हर इक ख़्वाब मर रहा है बस

सादिया सफ़दर सादी

क्यूँ भटकती सहरा में घर भी इक ख़राबा था

सादिया रोशन सिद्दीक़ी

तुम्हारा नाम किसी अजनबी के लब पर था

सादिक़ नसीम

वो जिस का रंग सलोना है बादलों की तरह

सादिक़ नसीम

उदास उदास सर-ए-साग़र-ओ-सुबू भी मैं

सादिक़ नसीम

शिकस्त-ए-आबला-ए-दिल में नग़्मगी है बहुत

सादिक़ नसीम

रश्क-ए-महताब जहाँ-ताब था हर क़र्या-ए-जाँ

सादिक़ नसीम

नज़र नज़र से वो कलियाँ खिला खिला भी गया

सादिक़ नसीम

जो लब पे न लाऊँ वही शे'रों में कहूँ मैं

सादिक़ नसीम

अज़मत-ए-फ़िक्र के अंदाज़ अयाँ भी होंगे

सादिक़ नसीम

अपनी आँखों से तो दरिया भी सराब-आसा मिले

सादिक़ नसीम

ये इंतिहा-ए-जुनूँ है कि ग़ैर ही सा लगा

सादिक़ इंदौरी

महक रहा है बदन सारा कैसी ख़ुशबू है

सादिक़ इंदौरी

एक इक लम्हा मुझे ज़ीस्त से बे-ज़ारी है

सादिक़ इंदौरी

दिल को पैहम दर्द से दो-चार रहने दीजिए

सादिक़ इंदौरी

गुज़रे हैं तेरे साथ जो दिन-रात अभी तक

सादिक़ा फ़ातिमी

वो पीपल के तले टूटी हुई मेहराब का मंज़र

सदफ़ जाफ़री

शिकवे की चुभन मुझ को सदा अच्छी लगी है

सदफ़ जाफ़री

रास्ते फैले हुए जितने भी थे पत्थर के थे

सदफ़ जाफ़री

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