दिल Poetry (page 149)

अजब तरह से मैं सर्फ़-ए-मलाल होने लगा

सहर अंसारी

अब यही रंज-ए-बे-दिली मुझ को मिटाए या बनाए

सहर अंसारी

कब तलक हमारी सई-ए-अमल राएगाँ रहे

सग़ीर अहमद सूफ़ी

काम आई इश्क़ की दीवानगी कल रात को

सग़ीर अहमद सूफ़ी

इश्क़ क्या है ख़ुद-फ़रामोशी मुसलसल इज़्तिराब

सग़ीर अहमद सग़ीर अहसनी

कैसे जानूँ कि जहाँ ख़्वाब-नुमा होता है

सग़ीर मलाल

क्यूँ तू ने वा किया था बंद-ए-क़बा चमन में

सग़ीर अली मुरव्वत

कैसे कैसे मंज़र मेरी आँखों में आ जाते हैं

सग़ीर अालम

ऐ दिल-ए-बे-क़रार चुप हो जा

साग़र सिद्दीक़ी

ज़ख़्म-ए-दिल पर बहार देखा है

साग़र सिद्दीक़ी

रूदाद-ए-मोहब्बत क्या कहिए कुछ याद रही कुछ भूल गए

साग़र सिद्दीक़ी

मेरे तसव्वुरात हैं तहरीरें इश्क़ की

साग़र सिद्दीक़ी

ख़ता-वार-ए-मुरव्वत हो न मरहून-ए-करम हो जा

साग़र सिद्दीक़ी

कलियों की महक होता तारों की ज़िया होता

साग़र सिद्दीक़ी

इस दर्जा इश्क़ मौजिब-ए-रुस्वाई बन गया

साग़र सिद्दीक़ी

हर मरहला-ए-शौक़ से लहरा के गुज़र जा

साग़र सिद्दीक़ी

एक वा'दा है किसी का जो वफ़ा होता नहीं

साग़र सिद्दीक़ी

बरगश्ता-ए-यज़्दान से कुछ भूल हुई है

साग़र सिद्दीक़ी

ऐ दिल-ए-बे-क़रार चुप हो जा

साग़र सिद्दीक़ी

सैलाब-ए-तबस्सुम से दरमान-ए-जराहत कर

साग़र निज़ामी

सदियों की शब-ए-ग़म को सहर हम ने बनाया

साग़र निज़ामी

रातों को तसव्वुर है उन का और चुपके चुपके रोना है

साग़र निज़ामी

फिर रह-ए-इश्क़ वही ज़ाद-ए-सफ़र माँगे है

साग़र निज़ामी

नग़्मे हवा ने छेड़े फ़ितरत की बाँसुरी में

साग़र निज़ामी

नदीम-ए-दर्द-ए-मोहब्बत बड़ा सहारा है

साग़र निज़ामी

जो रहीन-ए-तग़य्युरात नहीं

साग़र निज़ामी

हम आँखों से भी अर्ज़-ए-तमन्ना नहीं करते

साग़र निज़ामी

गेसू को तिरे रुख़ से बहम होने न देंगे

साग़र निज़ामी

आँख तुम्हारी मस्त भी है और मस्ती का पैमाना भी

साग़र निज़ामी

ज़रूरत-ए-रिश्ता

साग़र ख़य्यामी

Collection of Hindi Poetry. Get Best Hindi Shayari, Poems and ghazal. Read shayari Hindi, poetry by famous Hindi and Urdu poets. Share poetry hindi on Facebook, Whatsapp, Twitter and Instagram.