दिल Poetry (page 281)

मोहब्बत नग़्मा भी है साज़ भी है

बिर्ज लाल रअना

ख़याल को ज़ौ नज़र को ताबिश नफ़स को रख़शंदगी मिलेगी

बिर्ज लाल रअना

आरज़ूएँ नज़्र-ए-दौराँ नज़्र-ए-जानाँ हो गईं

बिर्ज लाल रअना

आप अपने रक़ीब हैं हम लोग

बिर्ज लाल रअना

वो: एक

बिमल कृष्ण अश्क

तुझ जैसा इक आँचल चाहूँ अपने जैसा दामन ढूँडूँ

बिमल कृष्ण अश्क

किधर जाऊँ कहीं रस्ता नहीं है

बिमल कृष्ण अश्क

जो दिल में उस को बसाए वो और कुछ न करे

बिमल कृष्ण अश्क

चाँद को रेशमी बादल से उलझता देखूँ

बिमल कृष्ण अश्क

ऐसे में रोज़ रोज़ कोई ढूँडता मुझे

बिमल कृष्ण अश्क

क़ासिद तू ख़त को लाया है क्यूँकर खुला हुआ

बिल्क़ीस बेगम

आता है कोई लुत्फ़ का सामाँ लिए हुए

बिल्क़ीस बेगम

कितने सादा हैं हम कि बैठे हैं

बिलक़ीस ज़फ़ीरुल हसन

हर-दिल-अज़ीज़ वो भी है हम भी हैं ख़ुश-मिज़ाज

बिलक़ीस ज़फ़ीरुल हसन

अनहोनी कुछ ज़रूर हुई दिल के साथ आज

बिलक़ीस ज़फ़ीरुल हसन

पाबंदियों से अपनी निकलते वो पा न थे

बिलक़ीस ज़फ़ीरुल हसन

नज़र आता है वो जैसा नहीं है

बिलक़ीस ज़फ़ीरुल हसन

किस ने कहा किसी का कहा तुम किया करो

बिलक़ीस ज़फ़ीरुल हसन

कब एक रंग में दुनिया का हाल ठहरा है

बिलक़ीस ज़फ़ीरुल हसन

जीना है ख़ूब औरों की ख़ातिर जिया करो

बिलक़ीस ज़फ़ीरुल हसन

जाने क्या कुछ है आज होने को

बिलक़ीस ज़फ़ीरुल हसन

देता था जो साया वो शजर काट रहा है

बिलक़ीस ज़फ़ीरुल हसन

बे-तअल्लुक़ सारे रिश्ते कौन किस का आश्ना

बिलक़ीस ज़फ़ीरुल हसन

अपनी तो कोई बात बनाए नहीं बनी

बिलक़ीस ज़फ़ीरुल हसन

रंग ले कर नया उदासी का

बिल्क़ीस ख़ान

करूँ क्या सख़्त मुश्किल आ पड़ी है

बिल्क़ीस ख़ान

हमारे दिल का न दर खटखटा परेशानी

बिल्क़ीस ख़ान

घर में जब बेटियाँ नहीं होंगी

बिल्क़ीस ख़ान

दिल जो तेशा-ज़नी पे माइल है

बिल्क़ीस ख़ान

सुना है मैं ने अज़िय्यत मज़ा भी देती है

बिलाल अहमद

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