दिल Poetry (page 280)

मेरे दिल को भी पड़ा रहने दो

बिस्मिल सईदी

वही होती है रहबर जो तमन्ना दिल में होती है

बिस्मिल सईदी

रह-रव-ए-राह-ए-मोहब्बत कौन सी मंज़िल में है

बिस्मिल सईदी

कौन समझे इश्क़ की दुश्वारियाँ

बिस्मिल सईदी

इश्क़ जो ना-गहाँ नहीं होता

बिस्मिल सईदी

अब इश्क़ रहा न वो जुनूँ है

बिस्मिल सईदी

हैराँ हूँ कि अब लाऊँ कहाँ से मैं ज़बाँ और

बिस्मिल साबरी

वक़्त आने दे दिखा देंगे तुझे ऐ आसमाँ

बिस्मिल अज़ीमाबादी

सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

बिस्मिल अज़ीमाबादी

ये बुत फिर अब के बहुत सर उठा के बैठे हैं

बिस्मिल अज़ीमाबादी

तंग आ गए हैं क्या करें इस ज़िंदगी से हम

बिस्मिल अज़ीमाबादी

सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

बिस्मिल अज़ीमाबादी

निगाह-ए-क़हर होगी या मोहब्बत की नज़र होगी

बिस्मिल अज़ीमाबादी

मेरी दुआ कि ग़ैर पे उन की नज़र न हो

बिस्मिल अज़ीमाबादी

ख़िज़ाँ जब तक चली जाती नहीं है

बिस्मिल अज़ीमाबादी

कहाँ आया है दीवानों को तेरा कुछ क़रार अब तक

बिस्मिल अज़ीमाबादी

जब कभी नाम-ए-मोहम्मद लब पे मेरे आए है

बिस्मिल अज़ीमाबादी

ये कैसी आग अभी ऐ शम्अ तेरे दिल में बाक़ी है

बिस्मिल इलाहाबादी

याद आता है समाँ मुझ को ख़ुद-आराई का

बिस्मिल इलाहाबादी

उन से कह दो कि इलाज-ए-दिल-ए-शैदा न करें

बिस्मिल इलाहाबादी

साज़-ए-हस्ती का अजब जोश नज़र आता है

बिस्मिल इलाहाबादी

क़ाबिल-ए-शरह मिरा हाल-ए-दिल-ए-ज़ार न था

बिस्मिल इलाहाबादी

मिल चुका महफ़िल में अब लुत्फ़-ए-शकेबाई मुझे

बिस्मिल इलाहाबादी

किसी तरह भी किसी से न दिल लगाना था

बिस्मिल इलाहाबादी

जो न करना था किया जो कुछ न होना था हुआ

बिस्मिल इलाहाबादी

जीने वाला ये समझता नहीं सौदाई है

बिस्मिल इलाहाबादी

आज़ार-ओ-जफ़ा-ए-पैहम से उल्फ़त में जिन्हें आराम नहीं

बिस्मिल इलाहाबादी

सिमटा तिरा ख़याल तो दिल में समा गया

बिस्मिल आग़ाई

कितना अजीब शब का ये मंज़र लगा मुझे

बिस्मिल आग़ाई

ज़ब्त-ए-नाला दिल-ए-फ़िगार न कर

बिर्ज लाल रअना

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