दिल Poetry (page 312)

इधर भी आ

असरार-उल-हक़ मजाज़

गुरेज़

असरार-उल-हक़ मजाज़

फ़िक्र

असरार-उल-हक़ मजाज़

ए'तिराफ़

असरार-उल-हक़ मजाज़

एक ग़मगीन याद

असरार-उल-हक़ मजाज़

एक दोस्त की ख़ुश-मज़ाक़ी पर

असरार-उल-हक़ मजाज़

दिल्ली से वापसी

असरार-उल-हक़ मजाज़

बर्बत-ए-शिकस्ता

असरार-उल-हक़ मजाज़

आवारा

असरार-उल-हक़ मजाज़

आज की रात

असरार-उल-हक़ मजाज़

आज भी

असरार-उल-हक़ मजाज़

यूँही बैठे रहो बस दर्द-ए-दिल से बे-ख़बर हो कर

असरार-उल-हक़ मजाज़

ये जहाँ बारगह-ए-रित्ल-ए-गिराँ है साक़ी

असरार-उल-हक़ मजाज़

तस्कीन-ए-दिल-ए-महज़ूँ न हुई वो सई-ए-करम फ़रमा भी गए

असरार-उल-हक़ मजाज़

सीने में उन के जल्वे छुपाए हुए तो हैं

असरार-उल-हक़ मजाज़

शौक़ के हाथों ऐ दिल-ए-मुज़्तर क्या होना है क्या होगा

असरार-उल-हक़ मजाज़

साज़गार है हमदम इन दिनों जहाँ अपना

असरार-उल-हक़ मजाज़

सारा आलम गोश-बर-आवाज़ है

असरार-उल-हक़ मजाज़

साक़ी-ए-गुलफ़ाम बा-सद एहतिमाम आ ही गया

असरार-उल-हक़ मजाज़

रह-ए-शौक़ से अब हटा चाहता हूँ

असरार-उल-हक़ मजाज़

निगाह-ए-लुत्फ़ मत उठ ख़ूगर-ए-आलाम रहने दे

असरार-उल-हक़ मजाज़

नहीं ये फ़िक्र कोई रहबर-ए-कामिल नहीं मिलता

असरार-उल-हक़ मजाज़

मिरी वफ़ा का तिरा लुत्फ़ भी जवाब नहीं

असरार-उल-हक़ मजाज़

कुछ तुझ को ख़बर है हम क्या क्या ऐ शोरिश-ए-दौराँ भूल गए

असरार-उल-हक़ मजाज़

ख़ुद दिल में रह के आँख से पर्दा करे कोई

असरार-उल-हक़ मजाज़

ख़ामुशी का तो नाम होता है

असरार-उल-हक़ मजाज़

करिश्मा-साजी-ए-दिल देखता हूँ

असरार-उल-हक़ मजाज़

कमाल-ए-इश्क़ है दीवाना हो गया हूँ मैं

असरार-उल-हक़ मजाज़

जिगर और दिल को बचाना भी है

असरार-उल-हक़ मजाज़

इज़्न-ए-ख़िराम लेते हुए आसमाँ से हम

असरार-उल-हक़ मजाज़

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