दिल Poetry (page 311)

मंज़िलें भी ये शिकस्ता-बाल-ओ पर भी देखना

अताउल हक़ क़ासमी

क्या क्या न प्यास जागे मिरे दिल के दश्त में

अता तुराब

तन्हाइयों के दश्त में भागे जो रात भर

अता तुराब

कहीं जमाल-पज़ीरी की हद नहीं रखता

अता तुराब

कब कहाँ क्या मिरे दिलदार उठा लाएँगे

अता तुराब

ज़िंदगी आईना है आईना-आराई है

अता शाद

बड़ा कठिन है रास्ता जो आ सको तो साथ दो

अता शाद

ख़्वाब की दिल्ली

अता आबिदी

सर पे सूरज हो मगर साया न हो ऐसा न था

अता आबिदी

पस-ए-दीवार हुज्जत किस लिए है

अता आबिदी

जागते ही नज़र अख़बार में खो जाती है

अता आबिदी

ये आना कोई आना है कि बस रस्मन चले आए

असरार-उल-हक़ मजाज़

तस्कीन-ए-दिल-ए-महज़ूँ न हुई वो सई-ए-करम फ़रमा भी गए

असरार-उल-हक़ मजाज़

कब किया था इस दिल पर हुस्न ने करम इतना

असरार-उल-हक़ मजाज़

हिज्र में कैफ़-ए-इज़्तिराब न पूछ

असरार-उल-हक़ मजाज़

तिफ़्ली के ख़्वाब

असरार-उल-हक़ मजाज़

शरारे

असरार-उल-हक़ मजाज़

साक़ी

असरार-उल-हक़ मजाज़

सानेहा

असरार-उल-हक़ मजाज़

रात और रेल

असरार-उल-हक़ मजाज़

पर्दा और इस्मत

असरार-उल-हक़ मजाज़

नूरा

असरार-उल-हक़ मजाज़

नुमाइश में

असरार-उल-हक़ मजाज़

नज़्र-ए-दिल

असरार-उल-हक़ मजाज़

नज़्र-ए-अलीगढ़

असरार-उल-हक़ मजाज़

मज़दूरों का गीत

असरार-उल-हक़ मजाज़

मजबूरियाँ

असरार-उल-हक़ मजाज़

किस से मोहब्बत है

असरार-उल-हक़ मजाज़

ख़्वाब-ए-सहर

असरार-उल-हक़ मजाज़

इंक़लाब

असरार-उल-हक़ मजाज़

Collection of Hindi Poetry. Get Best Hindi Shayari, Poems and ghazal. Read shayari Hindi, poetry by famous Hindi and Urdu poets. Share poetry hindi on Facebook, Whatsapp, Twitter and Instagram.