दिल Poetry (page 325)

नए मौसम की बशारत हैं हम

अरशद महमूद नाशाद

मैं ख़ाक छानता हूँ आफ़्ताब देखता हूँ

अरशद महमूद नाशाद

ज़मीं की कोख से पहले शजर निकालता है

अरशद महमूद अरशद

ख़ुदी के ज़ो'म में ऐसा वो मुब्तला हुआ है

अरशद महमूद अरशद

किस के सवाल पर ये दिल रोता है सारी सारी रात

अरशद लतीफ़

मोहब्बत सिर्फ़ इक जज़्बा नहीं है

अरशद लतीफ़

कोई नहीं है इंतिज़ार सुब्ह-ए-विसाल के सिवा

अरशद लतीफ़

एक सूरत तिरी बनाने में

अरशद लतीफ़

ख़ाक-ए-सहरा तो बहुत दूर है ऐ वहशत-ए-दिल

अरशद कमाल

तलातुम है न जाँ-लेवा भँवर है

अरशद कमाल

समुंदर से किसी लम्हे भी तुग़्यानी नहीं जाती

अरशद कमाल

किया है मैं ने ऐसा क्या कि ऐसा हो गया है

अरशद कमाल

फ़िक्र सोई है सर-ए-शाम जगा दी जाए

अरशद कमाल

ऐ दिल तिरे तुफ़ैल जो मुझ पर सितम हुए

अरशद कमाल

फिर चंद दिनों से वो हर शब ख़्वाबों में हमारे आते हैं

अरशद काकवी

ये ख़ाकी पैरहन इक इस्म की बंदिश में रहता है

अरशद जमाल 'सारिम'

प्यास हर ज़र्रा-ए-सहरा की बुझाई गई है

अरशद जमाल 'सारिम'

पलट कर देखने का मुझ में यारा ही नहीं था

अरशद जमाल 'सारिम'

कहाँ कहाँ से सुनाऊँ तुम्हें फ़साना-ए-शब

अरशद जमाल 'सारिम'

जुड़े हुए हैं परी-ख़ाने मेरे काग़ज़ से

अरशद जमाल 'सारिम'

इज़्तिराब ऐसा हुआ दिल का सहारा मुझ को

अरशद जमाल 'सारिम'

फ़ना हुआ तो मैं तार-ए-नफ़स में लौट आया

अरशद जमाल 'सारिम'

दो-चार सितारे ही मिरी आँख में धर जा

अरशद जमाल 'सारिम'

बे-अमाँ हूँ इन दिनों मैं दर-ब-दर फिरता हूँ मैं

अरशद जमाल 'सारिम'

बस कि इक लम्स की उम्मीद पे वारे हुए हैं

अरशद जमाल 'सारिम'

यार की फ़र्त-ए-नज़ाकत का हूँ मैं शुक्र-गुज़ार

अरशद अली ख़ान क़लक़

वो रिंद हूँ कि मुझे हथकड़ी से बैअत है

अरशद अली ख़ान क़लक़

सितम वो तुम ने किए भूले हम गिला दिल का

अरशद अली ख़ान क़लक़

फिर मुझ से इस तरह की न कीजेगा दिल-लगी

अरशद अली ख़ान क़लक़

फँस गया है दाम-ए-काकुल में बुतान-ए-हिन्द के

अरशद अली ख़ान क़लक़

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