दिल Poetry (page 356)

उठते हुए तूफ़ान का मंज़र नहीं देखा

आलमताब तिश्ना

सिवाए-दर-ब-दरी उस को ख़ाक मिलता है

आलमताब तिश्ना

शिकस्त-ए-शीशा-ए-दिल की सदा हूँ

आलमताब तिश्ना

मिरी दस्तरस में है गर क़लम मुझे हुस्न-ए-फ़िक्र-ओ-ख़याल दे

आलमताब तिश्ना

दर्द की इक लहर बल खाती है यूँ दिल के क़रीब

आलमताब तिश्ना

असीर-ए-दश्त-ए-बला का न माजरा कहना

आलमताब तिश्ना

अब भी ज़र्रों पे सितारों का गुमाँ है कि नहीं

आलमताब तिश्ना

आइना-ख़ाना भी अंदोह-ए-तमन्ना निकला

आलमताब तिश्ना

उर्दू

आलम मुज़फ्फ़र नगरी

रात गए अक्सर दिल के वीरानों में

आलम ख़ुर्शीद

अपनी कहानी दिल में छुपा कर रखते हैं

आलम ख़ुर्शीद

ज़रा सी धूप ज़रा सी नमी के आने से

आलम ख़ुर्शीद

याद करते हो मुझे सूरज निकल जाने के बा'द

आलम ख़ुर्शीद

तुम जिस को ढूँडते हो ये महफ़िल नहीं है वो

आलम ख़ुर्शीद

तिरे ख़याल को ज़ंजीर करता रहता हूँ

आलम ख़ुर्शीद

तह-ब-तह है राज़ कोई आब की तहवील में

आलम ख़ुर्शीद

सियाह रात के बदन पे दाग़ बन के रह गए

आलम ख़ुर्शीद

नए सिरे से कोई सफ़र आग़ाज़ नहीं करता

आलम ख़ुर्शीद

किस लम्हे हम तेरा ध्यान नहीं करते

आलम ख़ुर्शीद

कभी कभी कितना नुक़सान उठाना पड़ता है

आलम ख़ुर्शीद

जल बुझा हूँ मैं मगर सारा जहाँ ताक में है

आलम ख़ुर्शीद

जब तक खुली नहीं थी असरार लग रही थी

आलम ख़ुर्शीद

हर घर में कोई तह-ख़ाना होता है

आलम ख़ुर्शीद

हमेशा दिल में रहता है कभी गोया नहीं जाता

आलम ख़ुर्शीद

बस एक तिरे ख़्वाब से इंकार नहीं है

आलम ख़ुर्शीद

ये पूछ आ के कौन नसीबों जिया है दिल

अकरम नक़्क़ाश

लहू तेज़ाब करना चाहता है

अकरम नक़्क़ाश

कुछ फ़ासला नहीं है अदू और शिकस्त में

अकरम नक़्क़ाश

कोई सुनता ही नहीं किस को सुनाने लग जाएँ

अकरम नक़्क़ाश

हब्स-ए-दरूँ पे जिस्म-ए-गिराँ-बार संग था

अकरम नक़्क़ाश

Collection of Hindi Poetry. Get Best Hindi Shayari, Poems and ghazal. Read shayari Hindi, poetry by famous Hindi and Urdu poets. Share poetry hindi on Facebook, Whatsapp, Twitter and Instagram.