दिल Poetry (page 7)

शाम होने वाली थी जब वो मुझ से बिछड़ा था ज़िंदगी की राहों में

ज़ुबैर रिज़वी

शफ़क़-सिफ़ात जो पैकर दिखाई देता है

ज़ुबैर रिज़वी

पूछ न हम से कैसे तुझ तक नक़्द-ए-दिल-ओ-जाँ लाए हम

ज़ुबैर रिज़वी

फिर दिल को रोज़ ओ शब की वही ईद चाहिए

ज़ुबैर रिज़वी

कहाँ मैं जाऊँ ग़म-ए-इश्क़-ए-राएगाँ ले कर

ज़ुबैर रिज़वी

कभी ख़िरद से कभी दिल से दोस्ती कर ली

ज़ुबैर रिज़वी

हम बिछड़ के तुम से बादल की तरह रोते रहे

ज़ुबैर रिज़वी

हम बिछड़ के तुम से बादल की तरह रोते रहे

ज़ुबैर रिज़वी

हवा की अंधी पनाहों में मत उछाल मुझे

ज़ुबैर रिज़वी

हर क़दम सैल-ए-हवादिस से बचाया है मुझे

ज़ुबैर रिज़वी

है धूप कभी साया शोला है कभी शबनम

ज़ुबैर रिज़वी

बिछड़ते दामनों में फूल की कुछ पत्तियाँ रख दो

ज़ुबैर रिज़वी

बरसों में तुझे देखा तो एहसास हुआ है

ज़ुबैर रिज़वी

अपने घर के दर-ओ-दीवार को ऊँचा न करो

ज़ुबैर रिज़वी

साफ़ आईना है क्यूँ मुझे धुँदला दिखाई दे

ज़ुबैर फ़ारूक़

मेरा सारा बदन राख हो भी चुका मैं ने दिल को बचाया है तेरे लिए

ज़ुबैर फ़ारूक़

आँखों में है बसा हुआ तूफ़ान देखना

ज़ुबैर फ़ारूक़

ज़ेहन परेशाँ हो जाता है और भी कुछ तन्हाई में

ज़ुबैर अमरोहवी

हर एक लम्हा तिरी याद में बसर करना

ज़ुबैर अमरोहवी

हमारा दिल तो हमेशा से इक जगह पर है

ज़ुबैर अली ताबिश

आज तो दिल के दर्द पर हँस कर

ज़ुबैर अली ताबिश

वो पास क्या ज़रा सा मुस्कुरा के बैठ गया

ज़ुबैर अली ताबिश

दिल फिर उस कूचे में जाने वाला है

ज़ुबैर अली ताबिश

बार-ए-ग़म-ए-जहाँ भी है तेरा ख़याल भी

ज़ोहरा नसीम

अब दिल है उन के हल्क़ा-ए-दाम-ए-जमाल में

ज़ोहरा नसीम

हर्फ़-ओ-बयाँ, नज़ारे, सितारे, दिल ओ नज़र

ज़ियाउल हसन

अभी मुझ से किसी को मोहब्बत नहीं हुई

ज़ियाउल हसन

मौजूद कुछ नहीं यहाँ मादूम कुछ नहीं

ज़ियाउल हसन

इसी नदामत से उस के कंधे झुके हुए हैं

ज़िया मज़कूर

सूरज निकलने शाम के ढलने में आ रहूँ

ज़िया-उल-मुस्तफ़ा तुर्क

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