दिन Poetry (page 96)

सुर्मा हो या तारा

अली अकबर नातिक़

सफ़ीर-ए-लैला-3

अली अकबर नातिक़

सफ़ीर-ए-लैला-2

अली अकबर नातिक़

सफ़ीर-ए-लैला-1

अली अकबर नातिक़

नौहा

अली अकबर नातिक़

लुहार जानता नहीं

अली अकबर नातिक़

हुजूम-ए-गिर्या

अली अकबर नातिक़

हिज्र बना आज़ार सफ़र कैसे कटता

अली अकबर मंसूर

सारा दिन बे-कार बैठे शाम को घर आ गए

अली अकबर अब्बास

जो ख़ुद को पाएँ तो फिर दूसरा तलाश करें

अली अकबर अब्बास

देखने में लगती थी भीगती सिमटती रात

अली अकबर अब्बास

अँधेरी बस्तियाँ रौशन मनारे डूब जाएँगे

अली अकबर अब्बास

तुम जो आओगे तो मौसम दूसरा हो जाएगा

अली अहमद जलीली

ग़म से मंसूब करूँ दर्द का रिश्ता दे दूँ

अली अहमद जलीली

ये किस मुहिम पर चले थे हम जिस में रास्ते पुर-ख़तर न आए

अलीना इतरत

जिस दिन से उठ के हम तिरी महफ़िल से आए हैं

अलीम उस्मानी

लब क्या खुले कि क़ुव्वत-ए-गोयाई छिन गई

अलीम सबा नवेदी

ख़ुश्क आँखों से लहू फूट के रोना इक दिन

अलीम सबा नवेदी

घबराएँ हवादिस से क्या हम जीने के सहारे निकलेंगे

अलीम मसरूर

बन कर लहू यक़ीन न आए तो देख लें

अलीम अफ़सर

मैं जिस जगह भी रहूँगा वहीं पे आएगा

आलम ख़ुर्शीद

दश्त को ढूँडने निकलूँ तो जज़ीरा निकले

अकरम नक़्क़ाश

सितारा आँख में दिल में गुलाब क्या रखना

अकरम महमूद

चढ़े हुए हैं जो दरिया उतर भी जाएँगे

अकरम महमूद

गुज़रते दौड़ते लम्हे हिसाब में लिखिए

अकमल इमाम

यादें

अख़्तर-उल-ईमान

तर्ग़ीब और उस के ब'अद

अख़्तर-उल-ईमान

तन्हाई में

अख़्तर-उल-ईमान

तफ़ाउत

अख़्तर-उल-ईमान

तब्दीली

अख़्तर-उल-ईमान

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