दिन Poetry (page 98)

लफ़्ज़ लिखना है तो फिर काग़ज़ की निय्यत से न डर

अख़्तर शेख़

यारान-ए-तेज़-गाम से रंजिश कहाँ है अब

अख़तर शाहजहाँपुरी

कहाँ से लाएँगे आँसू अज़ा-दारी के मौसम में

अख़तर शाहजहाँपुरी

हम ने माना इक न इक दिन लौट के तू आ जाएगा

अख़्तर सईद ख़ान

ज़िंदगी क्या हुए वो अपने ज़माने वाले

अख़्तर सईद ख़ान

नैरंगी-ए-नशात-ए-तमन्ना अजीब है

अख़्तर सईद ख़ान

एक कहानी

अख़्तर रज़ा सलीमी

वो भी क्या दिन थे क्या ज़माने थे

अख़्तर रज़ा सलीमी

रिवायात की तख़्लीक़

अख़्तर पयामी

सिलसिला ज़ख़्म ज़ख़्म जारी है

अख़्तर नज़्मी

दिल ही रह-ए-तलब में न खोना पड़ा मुझे

अख़तर मुस्लिमी

तेरा पार उतरना कैसा

अख़्तर हुसैन जाफ़री

सधाए हुए परिंदे

अख़्तर हुसैन जाफ़री

रेत सहरा नहीं

अख़्तर हुसैन जाफ़री

उफ़ुक़ उफ़ुक़ नए सूरज निकलते रहते हैं

अख़्तर होशियारपुरी

न जब कोई शरीक-ए-ज़ात होगा

अख़्तर होशियारपुरी

मैं ने यूँ देखा उसे जैसे कभी देखा न था

अख़्तर होशियारपुरी

मैं हर्फ़ देखूँ कि रौशनी का निसाब देखूँ

अख़्तर होशियारपुरी

यारों के इख़्लास से पहले दिल का मिरे ये हाल न था

अख़्तर अंसारी अकबराबादी

रहबर-ए-तब्ल-ओ-निशाँ और ज़रा तेज़ क़दम

अख़्तर अंसारी अकबराबादी

न राज़-ए-इब्तिदा समझो न राज़-ए-इंतिहा समझो

अख़्तर अंसारी अकबराबादी

मिला के क़तरा-ए-शबनम में रंग ओ निकहत-ए-गुल

अख़्तर अंसारी

ये सनम रिवायत-ओ-नक़्ल के हुबल-ओ-मनात से कम नहीं

अख़्तर अंसारी

ये हसीन फ़ितरत के हुस्न का अनीला-पन

अख़्तर अंसारी

सुना के अपने ऐश-ए-ताम की रूदाद के टुकड़े

अख़्तर अंसारी

कोई मआल-ए-मोहब्बत मुझे बताओ नहीं

अख़्तर अंसारी

किसी से लड़ाएँ नज़र और झेलें मोहब्बत के ग़म इतनी फ़ुर्सत कहाँ

अख़्तर अंसारी

ख़िज़ाँ में आग लगाओ बहार के दिन हैं

अख़्तर अंसारी

ग़म-ए-हयात कहानी है क़िस्सा-ख़्वाँ हूँ मैं

अख़्तर अंसारी

दिन मुरादों के ऐश की रातें

अख़्तर अंसारी

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