दिन Poetry (page 100)

घूम-फिर कर इसी कूचे की तरफ़ आएँगे

अजमल सिराज

जिस दिन से गया वो जान-ए-ग़ज़ल हर मिसरे की सूरत बिगड़ी

अजमल सिद्दीक़ी

इतराता गरेबाँ पर था बहुत, रह-ए-इश्क़ में कब का चाक हुआ

अजमल सिद्दीक़ी

आज़ार बहुत लज़्ज़त-ए-आज़ार बहुत है

अजमल अजमली

ज़िंदगी में प्यार का सौदा करो

अजीत सिंह हसरत

वो हर्फ़ हर्फ़ मुकम्मल किताब कर देगा

अजीत सिंह हसरत

मुझ को प्रेम कहानी कर दो

अजीत सिंह हसरत

ख़ाक में मिलना था आख़िर बे-निशाँ होना ही था

अजीत सिंह हसरत

जब मेरा घर बहिश्त सी गुल-वादियों में था

अजीत सिंह हसरत

हम भी गुज़र गए यहाँ कुछ पल गुज़ार के

अजय सहाब

मैं तकिए पर सितारे बो रहा हूँ

ऐतबार साजिद

अब तो ख़ुद अपनी ज़रूरत भी नहीं है हम को

ऐतबार साजिद

ये ठीक है कि बहुत वहशतें भी ठीक नहीं

ऐतबार साजिद

तिरे जैसा मेरा भी हाल था न सुकून था न क़रार था

ऐतबार साजिद

तर्क-ए-तअल्लुक़ कर तो चुके हैं इक इम्कान अभी बाक़ी है

ऐतबार साजिद

शहर-ए-हवा में जलते रहना अंदेशों की चौखट पर

ऐतबार साजिद

फूल थे रंग थे लम्हों की सबाहत हम थे

ऐतबार साजिद

फिर वही लम्बी दो-पहरें हैं फिर वही दिल की हालत है

ऐतबार साजिद

मैं तकिए पर सितारे बो हा हूँ

ऐतबार साजिद

किसी को हम से हैं चंद शिकवे किसी को बेहद शिकायतें हैं

ऐतबार साजिद

कैसे कहीं कि जान से प्यारा नहीं रहा

ऐतबार साजिद

कहा दिन को भी ये घर किस लिए वीरान रहता है

ऐतबार साजिद

जाने किस चाह के किस प्यार के गुन गाते हो

ऐतबार साजिद

धड़कन धड़कन यादों की बारात अकेला कमरा

ऐतबार साजिद

छोटे छोटे से मफ़ादात लिए फिरते हैं

ऐतबार साजिद

बंदे ज़मीन और आसमाँ सरमा की शब कहानियाँ

ऐतबार साजिद

फूल अल्लाह ने बनाए हैं महकने के लिए

ऐश देहलवी

फिरा किसी का इलाही किसी से यार न हो

ऐश देहलवी

बातें न किस ने हम को कहीं तेरे वास्ते

ऐश देहलवी

वहशत में दिल कितना कुशादा करना पड़ता है

ऐनुद्दीन आज़िम

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