दोस्त Poetry (page 23)

मदावा-ए-जुनूँ सैर-ए-गुलिस्ताँ से नहीं होता

एजाज़ वारसी

दिल बुझ गया तो गर्मी-ए-बाज़ार भी नहीं

एजाज़ वारसी

ना-सज़ा आलम-ए-इम्काँ में सज़ा लगता है

एजाज़ सिद्दीक़ी

चाँद

एजाज़ अहमद एजाज़

बात अब आई समझ में कि हक़ीक़त क्या थी

एहसान दरबंगावी

रानाई-ए-कौनैन से बे-ज़ार हमीं थे

एहसान दानिश

मिरे मिटाने की तदबीर थी हिजाब न था

एहसान दानिश

इश्क़ की दुनिया में इक हंगामा बरपा कर दिया

एहसान दानिश

बख़्श दी हाल-ए-ज़बूँ ने जल्वा-सामानी मुझे

एहसान दानिश

मर्दुम-गज़ीदा इंसान का इलाज

दिलावर फ़िगार

'ग़ालिब' को बुरा क्यूँ कहो

दिलावर फ़िगार

अमरीका शेर पढ़ने गए थे हमारे दोस्त

दिलावर फ़िगार

क्या कहिए दास्तान-ए-तमन्ना बदल गई

दिल शाहजहाँपुरी

ज़ीस्त बे-वादा-ए-अनवार-ए-सहर है कि जो थी

द्वारका दास शोला

मिरी बे-क़रारी मिरी आह-ओ-ज़ारी ये वहशत नहीं है तो फिर और क्या है

द्वारका दास शोला

दिल-ए-बे-मुद्दआ का मुद्दआ' क्या

द्वारका दास शोला

यक क़दम राह-ए-दोस्त है 'दाऊद'

दाऊद औरंगाबादी

हुस्न इस शम्अ-रू का है गुल-रंग

दाऊद औरंगाबादी

क़ैद-ए-ग़म-ए-हयात से अहल-ए-जहाँ मफ़र नहीं

दर्शन सिंह

कब ख़मोशी को मोहब्बत की ज़बाँ समझा था मैं

दर्शन सिंह

इश्क़ शबनम नहीं शरारा है

दर्शन सिंह

हँसी गुलों में सितारों में रौशनी न मिली

दर्शन सिंह

चश्म-ए-बीना हो तो क़ैद-ए-हरम-ओ-तूर नहीं

दर्शन सिंह

तोहमत-ए-चंद अपने ज़िम्मे धर चले

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

साक़ी मुझे शबाब का रसिया कहे सो हूँ

दानिश नज़ीर दानी

दुआ हमारी कभी बा-असर नहीं होती

दानिश फ़राही

दिल था बे-कैफ़ मोहब्बत की ख़ता से पहले

दानिश फ़राही

ज़िद हर इक बात पर नहीं अच्छी

दाग़ देहलवी

ज़माना दोस्ती पर इन हसीनों की न इतराए

दाग़ देहलवी

तेरी सूरत को देखता हूँ मैं

दाग़ देहलवी

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