दुनिया Poetry (page 19)

साँस की आस निगहबाँ है ख़बर-दार रहो

शोहरत बुख़ारी

रस्म-ए-गिर्या भी उठा दी हम ने

शोहरत बुख़ारी

कुछ हश्र से कम गर्मी-ए-बाज़ार नहीं है

शोहरत बुख़ारी

जाने किस किस की तवज्जोह का तमाशा देखा

शोहरत बुख़ारी

दिल तलबगार-ए-तमाशा क्यूँ था

शोहरत बुख़ारी

दिल ने किस मंज़िल-ए-बे-नाम में छोड़ा था मुझे

शोहरत बुख़ारी

बुत बने राह तकोगे कब तक

शोहरत बुख़ारी

बज़्म संवारूँ ग़ज़लें गाऊँ

शोहरत बुख़ारी

ऐश-ए-दुनिया का जब शुमार न था

शोहरत बुख़ारी

कभी वो रंज के साँचे में ढाल देता है

शोभा कुक्कल

बातें करने में तो दुनिया में सभी होश्यार थे

शोभा कुक्कल

ख़ुशी में ग़म मिला लेते हैं थोड़ा

शोएब निज़ाम

दुनिया से दुनिया में रह कर कैसे किनारा कर रक्खा है

शोएब निज़ाम

बस अपनी ख़ाक पर अब ख़ुद ही सुल्तानी करेंगे हम

शोएब निज़ाम

दिल-ए-आबाद का बर्बाद भी होना ज़रूरी है

शोएब बिन अज़ीज़

क़ल्ब का एहतिजाज होता है

शमशाद शाद

नाज़ भला किस बात का तुझ को पास-ए-हुनर जब कुछ भी नहीं

शमशाद शाद

गीली मिट्टी से बदन बनते हुए उम्र लगी

शमशाद शाद

साथ तेरा रहा नहीं बाक़ी

शिव रतन लाल बर्क़ पूंछवी

रही दिल की दिल में ज़बाँ तक न पहुँची

शिव रतन लाल बर्क़ पूंछवी

जब तिरा आसरा नहीं मिलता

शिव रतन लाल बर्क़ पूंछवी

इक दामन में फूल भरे हैं इक दामन में आग ही आग

शिव रतन लाल बर्क़ पूंछवी

यास की मंज़िल में तन्हाई थी और कुछ भी नहीं

शिव चरन दास गोयल ज़ब्त

जिन के फ़ुटपाठ पे घर पाँव में छाले होंगे

शिफ़ा कजगावन्वी

हवा भी गर्म है छाए हैं सुर्ख़ बादल क्यूँ

शिफ़ा कजगावन्वी

मौसम भी ख़ुश-गवार ज़माना भी रास है

शेवन बिजनौरी

होती है लबों पर ख़ामोशी आँखों में मोहब्बत होती है

शेवन बिजनौरी

तमन्ना है यही दिल की वहीं चलिए वहीं चलिए

शेरी भोपाली

ग़ज़ब है जुस्तजू-ए-दिल का ये अंजाम हो जाए

शेरी भोपाली

ज़ुल्फ़-ए-जानाँ पे तबीअत मिरी लहराई है

शेर सिंह नाज़ देहलवी

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