दुनिया Poetry (page 17)

उठिए तो कहाँ जाइए जो कुछ है यहीं है

सुहा मुजद्ददी

शौक़-ए-बुतान-ए-अंजुमन-आरा लिए हुए

सुहा मुजद्ददी

ऐ हमराज़

सूफ़िया अनजुम ताज

नज़र में ढल के उभरते हैं दिल के अफ़्साने

सूफ़ी तबस्सुम

नज़र में ढल के उभरते हैं दिल के अफ़्साने

सूफ़ी तबस्सुम

नाला-ए-सबा तन्हा फूल की हँसी तन्हा

सूफ़ी तबस्सुम

किस ने ग़म के जाल बिखेरे

सूफ़ी तबस्सुम

जब अश्क तिरी याद में आँखों से ढले हैं

सूफ़ी तबस्सुम

इस आलम-ए-वीराँ में क्या अंजुमन-आराई

सूफ़ी तबस्सुम

हुस्न मजबूर-ए-जफ़ा है शायद

सूफ़ी तबस्सुम

ज़िक्र जब होगा मोहब्बत में तबाही का कहीं

सुदर्शन फ़ाकिर

ज़िंदगी तुझ को जिया है कोई अफ़्सोस नहीं

सुदर्शन फ़ाकिर

मिरी ज़बाँ से मिरी दास्ताँ सुनो तो सही

सुदर्शन फ़ाकिर

कुछ तो दुनिया की इनायात ने दिल तोड़ दिया

सुदर्शन फ़ाकिर

फ़लसफ़े इश्क़ में पेश आए सवालों की तरह

सुदर्शन फ़ाकिर

मेरे अंदर

सुबोध लाल साक़ी

चुनाव

सुबोध लाल साक़ी

ज़बाँ को अपनी गुनहगार करने वाला हूँ

सुबोध लाल साक़ी

किसी नय रूह को जिस्मी क़बाएँ भेजी हैं

सुबोध लाल साक़ी

अपनी गुमशुदगी की अफ़्वाहें मैं फैलाता रहा

सुबोध लाल साक़ी

मुझे मलाल में रखना ख़ुशी तुम्हारी थी

सुबहान असद

अब ख़िज़ाँ आए या बहार आए

सोज़ नजीबाबादी

वफ़ाओं के इरादे वुसअ'त-ए-मंज़िल में रहते हैं

सोज़ बरेलवी

अचानक किसी ने जो चिलमन उठा दी

सोज़ बरेलवी

लाख बदला बदल नहीं पाए

सोनरूपा विशाल

ज़िंदगी तुझ को कहीं पर तो ठहरना होगा

सिया सचदेव

जिस दिन से मिरी तुम से शनासाई हुई है

सिया सचदेव

अब तिरे शहर से चुप-चाप गुज़रना होगा

सिया सचदेव

क्यूँ ध्यान बटाती है मिरा गर्दिश-ए-दुनिया

सिराज लखनवी

यूँ सुबुक-दोश हूँ जीने का भी इल्ज़ाम नहीं

सिराज लखनवी

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