दुनिया Poetry (page 70)

जग में कोई न टुक हँसा होगा

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

एक सब आग एक सब पानी

दानियाल तरीर

शहर से क्या गई जानिब-ए-दश्त-ए-ज़र ज़िंदगी फ़ाख़्ता

दानियाल तरीर

साक़ी मुझे शबाब का रसिया कहे सो हूँ

दानिश नज़ीर दानी

किस क़दर इज़्तिराब है यारो

दानिश फ़राही

गर तरन्नुम पर ही 'दानिश' मुनहसिर है शाइरी

दानिश अलीगढ़ी

आख़िरी वक़्त तलक साथ अंधेरों ने दिया

दानिश अलीगढ़ी

ज़िंदगी कर गई तूफ़ाँ के हवाले मुझ को

दानिश अलीगढ़ी

क्या ख़बर थी मुन्हरिफ़ अहल-ए-जहाँ हो जाएँगे

दानिश अलीगढ़ी

वो ज़माना भी तुम्हें याद है तुम कहते थे

दाग़ देहलवी

न जाना कि दुनिया से जाता है कोई

दाग़ देहलवी

उस से क्या ख़ाक हम-नशीं बनती

दाग़ देहलवी

क़रीने से अजब आरास्ता क़ातिल की महफ़िल है

दाग़ देहलवी

फिरे राह से वो यहाँ आते आते

दाग़ देहलवी

मिन्नतों से भी न वो हूर-शमाइल आया

दाग़ देहलवी

देख कर जौबन तिरा किस किस को हैरानी हुई

दाग़ देहलवी

भला हो पीर-ए-मुग़ाँ का इधर निगाह मिले

दाग़ देहलवी

अब वो ये कह रहे हैं मिरी मान जाइए

दाग़ देहलवी

हम को छेड़ा तो मचल जाएँगे अरमाँ की तरह

डी. राज कँवल

दुनिया पत्थर फेंक रही है झुँझला कर फ़र्ज़ानों पर

डी. राज कँवल

दोनों की आरज़ू में चमक बरक़रार है

चित्रांश खरे

जो आँसुओं को न चमकाए वो ख़ुशी क्या है

चरख़ चिन्योटी

जल्वा-ए-हुस्न से है सूरत-ए-औक़ात नई

चरख़ चिन्योटी

फ़ज़ा में कैफ़-फ़शाँ फिर सहाब है साक़ी

चरख़ चिन्योटी

बे-ख़ुदी में है न वो पी कर सँभल जाने में है

चरख़ चिन्योटी

बात कहने के लिए बात बनाई न गई

चरख़ चिन्योटी

बात कहने के लिए बात बनाई न गई

चरख़ चिन्योटी

अक़्ल हैरान है रहमत का तक़ाज़ा क्या है

चरख़ चिन्योटी

एक मरकज़ पे सिमट आई है सारी दुनिया

चरण सिंह बशर

जंग

चन्द्रभान ख़याल

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