दुनिया Poetry (page 78)

तेरा ख़याल भी है वज़-ए-ग़म का पास भी है

अज़ीम मुर्तज़ा

तिरा ख़याल भी है वज़-ए-ग़म का पास भी है

अज़ीम मुर्तज़ा

महरूमी के दुख और तन्हाई के रंज उठाए

अज़ीम मुर्तज़ा

लाई न सबा बू-ए-चमन अब के बरस भी

अज़ीम मुर्तज़ा

फ़ित्ना-सामाँ ही नहीं फ़ित्ना-ए-सामाँ निकले

अज़ीम मुर्तज़ा

ख़ला-ए-ज़ेहन के गुम्बद में गूँजता हूँ मैं

आज़ाद गुलाटी

ये इक शान-ए-ख़ुदा है मैं नहीं हूँ

आज़ाद अंसारी

न पूछो कौन हैं क्यूँ राह में नाचार बैठे हैं

आज़ाद अंसारी

कोई न देखे गूँज हवा की

अय्यूब ख़ावर

आँख की दहलीज़ से उतरा तो सहरा हो गया

अय्यूब ख़ावर

आ जाए न रात कश्तियों में

अय्यूब ख़ावर

निहत्ते आदमी पे बढ़ के ख़ंजर तान लेती है

औरंगज़ेब

अश्क को दरिया बनाया आँख को साहिल किया

औरंगज़ेब

आम रस्ते से हट के आया हूँ

औरंगज़ेब

ख़्वाहिशें दुनिया की बार-ए-दोश-ओ-गर्दन हो गईं

औज लखनवी

हमारे मा-बैन

अतीक़ुल्लाह

चराग़ हाथों के बुझ रहे हैं सितारा हर रह-गुज़र में रख दे

अतीक़ुल्लाह

कर के ख़्वाब आँख में पहले तो वो लाए ख़ुद को

आतिफ़ ख़ान

फूलों से बहारों में जुदा थे तो हमीं थे

अतहर राज़

ग़म के बादल दिल-ए-नाशाद पे ऐसे छाए

अतहर राज़

मिस्ल-ए-बाद-ए-सबा तेरे कूचे में ऐ जान-ए-जाँ आए हैं

अतहर नफ़ीस

फ़र्ज़ानों की इस बस्ती में एक अजब सौदाई है

अतहर नफ़ीस

मैं कि ख़ुद अपने ख़यालात का ज़िंदानी हूँ

अतहर नादिर

किस दर्जा मिरे शहर की दिलकश है फ़ज़ा भी

अतहर नादिर

मिरी मुश्किल अगर आसाँ बना देते तो अच्छा था

अतीक़ुर्रहमान सफ़ी

कटी है उम्र यहाँ एक घर बनाने में

अतीक़ मुज़फ़्फ़रपुरी

जिस को देखो वो गिरफ़्तार-ए-बला लगता है

अतीक़ मुज़फ़्फ़रपुरी

उठे जाते हैं दीदा-वर सभी आहिस्ता आहिस्ता

अतीक़ असर

घटा ज़ुल्फ़ों की जब से और काली होती जाती है

अतीक़ असर

सुलगती रेत की क़िस्मत में दरिया लिख दिया जाए

अतीक़ अंज़र

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