दुनिया Poetry (page 77)

मिरे नासेह मुझे समझा रहे हैं

अज़ीज़ लखनवी

काम दुनिया में बहुत करना है

अज़ीज़ लखनवी

जाम ख़ाली जहाँ नज़र आया

अज़ीज़ लखनवी

दिल हमारा है कि हम माइल-ए-फ़रियाद नहीं

अज़ीज़ लखनवी

चश्म-ए-साक़ी का तसव्वुर बज़्म में काम आ गया

अज़ीज़ लखनवी

भड़क उट्ठेंगे शो'ले एक दिन दुनिया की महफ़िल में

अज़ीज़ लखनवी

निगाह-ए-नाज़ में हया भी है

अज़ीज़ हैदराबादी

न बदलना था न बदला दिल-ए-शैदा अपना

अज़ीज़ हैदराबादी

जी-दारो! दोज़ख़ की हवा में किस की मोहब्बत जलती है

अज़ीज़ हामिद मदनी

हरम का आईना बरसों से धुँदला भी है हैराँ भी

अज़ीज़ हामिद मदनी

फ़िराक़ से भी गए हम विसाल से भी गए

अज़ीज़ हामिद मदनी

एक-आध हरीफ़-ए-ग़म-ए-दुनिया भी नहीं था

अज़ीज़ हामिद मदनी

एक ही शहर में रहते बस्ते काले कोसों दूर रहा

अज़ीज़ हामिद मदनी

शिव तो नहीं हम फिर भी हम ने दुनिया भर के ज़हर पिए

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

मैं उस के सामने उर्यां लगूँगी दुनिया को

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

हमारी बेबसी शहरों की दीवारों पे चिपकी है

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

वो इक नज़र से मुझे बे-असास कर देगा

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

किस क़दर कम-असास हैं कुछ लोग

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

हम कोई नादान नहीं कि बच्चों की सी बात करें

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

हम उस को भूल बैठे हैं अँधेरे हम पे तारी हैं

अज़ीज़ अन्सारी

घर से बाहर निकल कर

अज़ीज़ अन्सारी

ख़्वाहिश-ओ-ख़ाब के आगे भी कहीं जाना है

अज़ीम हैदर सय्यद

मआल-ए-दोस्ती कहिए हदीस-ए-मह-वशाँ कहिए

अज़हर सईद

मिरी दुनिया अकेली हो रही है

अज़हर नैयर

उजाला दश्त-ए-जुनूँ में बढ़ाना पड़ता है

अज़हर इनायती

तिरे तक़ाज़ों पे चेहरे बदल रहा हूँ मैं

अज़हर इनायती

जो दौलत तरक़्क़ी-रसाई बहुत है

अज़हर हाश्मी

कैसे दुनिया का जाएज़ा किया जाए

अज़हर फ़राग़

तुम उस की बातों में न आना

अज़हर अदीब

खिड़कियाँ खोल के कैसी ये सदाएँ आईं

अज़ीज़ परीहारी

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