दुनिया Poetry (page 76)

बहुत क़रीने की ज़िंदगी थी अजब क़यामत में आ बसा हूँ

अज़्म बहज़ाद

ये ख़ज़ाने का कोई साँप बना होता है

अज़लान शाह

कमाँ न तीर न तलवार अपनी होती है

अज़लान शाह

ये ख़ज़ाने का कोई साँप बना होता है

अज़लान शाह

समझ के रस्ता इधर से गुज़रने वालों ने

अज़लान शाह

पीरी नहीं चलती कि फ़क़ीरी नहीं चलती

अज़लान शाह

कमाँ न तीर न तलवार अपनी होती है

अज़लान शाह

हार को जीत के इम्कान से बाँधे हुए रख

अज़लान शाह

दुनिया के लिए ज़हर न खालें कोई हम भी

अज़लान शाह

तेरी यादें हैं जिन्हें दिल में बसा रक्खा है

अज़ीज़ुर्रहमान शहीद फ़तेहपुरी

कमाल ये है कि दुनिया को कुछ पता न लगे

अज़ीज़ुर्रहमान शहीद फ़तेहपुरी

ये हम पर लुत्फ़ कैसा ये करम क्या

अज़ीज़ वारसी

तिरी तलाश में निकले हैं तेरे दीवाने

अज़ीज़ वारसी

शीशा लब से जुदा नहीं होता

अज़ीज़ वारसी

ख़ुशी महसूस करता हूँ न ग़म महसूस करता हूँ

अज़ीज़ वारसी

इतने नज़दीक से आईने को देखा न करो

अज़ीज़ वारसी

एक मंज़र एक आलम

अज़ीज़ क़ैसी

चोर-बाज़ार

अज़ीज़ क़ैसी

मिटा के अंजुमन-ए-आरज़ू सदा दी है

अज़ीज़ क़ैसी

हर आँख लहू सागर है मियाँ हर दिल पत्थर सन्नाटा है

अज़ीज़ क़ैसी

कुछ देर तो दुनिया मिरे पहलू में खड़ी थी

अज़ीज़ नबील

ख़याल-ओ-ख़्वाब का सारा धुआँ उतर चुका है

अज़ीज़ नबील

ख़ाक चेहरे पे मल रहा हूँ मैं

अज़ीज़ नबील

हक़ारत से न देखो साकिनान-ए-ख़ाक की बस्ती

अज़ीज़ लखनवी

दिल नहीं जब तो ख़ाक है दुनिया

अज़ीज़ लखनवी

'मीर'

अज़ीज़ लखनवी

लज़्ज़त-ए-ग़म

अज़ीज़ लखनवी

बचपने की याद

अज़ीज़ लखनवी

तिरी कोशिश हम ऐ दिल सई-ए-ला-हासिल समझते हैं

अज़ीज़ लखनवी

न हुई हम से शब बसर न हुई

अज़ीज़ लखनवी

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