समझ के रस्ता इधर से गुज़रने वालों ने
समझ के रस्ता इधर से गुज़रने वालों ने
कहीं का छोड़ा न दिल से उतरने वालों ने
बने-बनाए हुए रास्तों पे चलते हुए
ख़ुदा बनाए ख़ुदाई से डरने वालों ने
हज़ार छेद किए झोलियों में अपनों की
तुम्हारे नाम पे ख़ैरात करने वालों ने
तवील उम्र की ढेरों दुआएँ भेजी हैं
मिरे चराग़ को पानी से भरने वालों ने
हमारी आँख में इक बूँद भी नहीं छोड़ी
मिसाल-ए-अब्र फ़लक पर उभरने वालों ने
ये किस तरह के अजब वाहिमों में डाल दिया
शराब ओ शहद की तस्दीक़ करने वालों ने
ज़बान-बंदी पे मजबूर हो गई दुनिया
वो खेल खेला है हैरत से मरने वालों ने
चराग़-ए-राह को ग़ारत-गरी सिखाई है
हवा-ए-शहर पे इल्ज़ाम धरने वालों ने
(1043) Peoples Rate This
Fatal error: Uncaught PDOException: SQLSTATE[42S22]: Column not found: 1054 Unknown column 'id' in 'ORDER BY' in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php:554 Stack trace: #0 /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php(554): PDOStatement->execute() #1 {main} thrown in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php on line 554